रायपुर,6 अगस्त 2026
जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड (TRIFED) की पहल वन धन विकास केंद्र योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं को महुआ से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस पहल से महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अपनी आय भी बढ़ा रही हैं।
राजनांदगांव जिले के कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र की महिलाओं ने इस योजना का सफलतापूर्वक लाभ उठाया है। पहले वे केवल महुआ का संग्रह करती थीं, लेकिन अब प्रशिक्षण के बाद महुआ लड्डू, कुकीज़, एनर्जी बार, स्क्वैश सहित कई उत्पाद तैयार कर बाजार में बेच रही हैं। आधुनिक प्रसंस्करण और आकर्षक पैकेजिंग से इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
वन धन विकास केंद्र में महिलाओं को उत्पाद निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छ उत्पादन, पैकेजिंग, लेबलिंग, भंडारण और विपणन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इससे वे बाजार की जरूरत के अनुरूप बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर उचित मूल्य प्राप्त कर रही हैं।
महुआ के मूल्यवर्धन से उसकी उपयोगिता और बाजार मूल्य दोनों में वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और महिलाओं की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। अब कच्चा महुआ बेचने के बजाय उससे तैयार उत्पादों के जरिए ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका का आधार मिल रहा है।
इन उत्पादों को ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के माध्यम से व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल से वन आधारित उत्पादों को नई पहचान मिली है और महिला स्व-सहायता समूहों को अपने उत्पादों के विपणन के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
कोरिनभाठा की महिलाओं की सफलता यह साबित करती है कि सही प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और प्रभावी विपणन के माध्यम से वन संपदा को रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बनाया जा सकता है।



