महुआ से बदली महिलाओं की तकदीर: वन धन योजना से मिली आत्मनिर्भरता और नई पहचान
वन धन विकास केंद्र योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की आदिवासी और ग्रामीण महिलाएं महुआ से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रशिक्षण, आधुनिक प्रसंस्करण और बेहतर बाजार उपलब्ध होने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
केरसई का महतारी सदन बना महिला सशक्तिकरण का केंद्र, स्व-सहायता समूहों को मिला स्थायी मंच
जशपुर जिले के केरसई में निर्मित महतारी सदन महिला स्व-सहायता समूहों के लिए नियमित बैठकों, आजीविका गतिविधियों और सामाजिक कार्यक्रमों का स्थायी केंद्र बनकर उभरा है।
नारायणपुर में रेशम क्रांति, कोसापालन से ग्रामीणों की आय बढ़ी, महिलाओं को मिला रोजगार
नारायणपुर में मलबरी और टसर रेशम योजनाओं ने ग्रामीणों की आजीविका को नई दिशा दी है। कोसापालन से महिलाओं और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है, जबकि उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
बलौदाबाजार में 40 महिलाओं को मिला धान और पैरा आर्ट का प्रशिक्षण, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम
बलौदाबाजार में स्व-सहायता समूह की 40 महिलाओं को धान और पैरा आर्ट का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य गैर-कृषि आजीविका, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आय को बढ़ावा देना है।
सुकमा में ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन’ की शुरुआत, ग्रामीणों को मिलेगा 125 दिनों का रोजगार
सुकमा में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) ग्राम योजना का शुभारंभ किया गया। योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का रोजगार और प्रतिदिन 300 रुपये की मजदूरी मिलेगी।



