सक्ती, 11 जून 2026
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवासों को लेकर बाराद्वार नगर पंचायत में विवाद गहराता जा रहा है। शासकीय भूमि के रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी कर आवास स्वीकृत कराने के आरोपों के बाद जनप्रतिनिधि और तत्कालीन पटवारी सवालों के घेरे में आ गए हैं। मामले की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने जांच टीम गठित कर दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार नगर पंचायत बाराद्वार में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 288 आवासों की स्वीकृति के लिए दस्तावेज तैयार किए गए थे। आरोप है कि इनमें से 246 आवास आबादी और घास मद की भूमि पर प्रस्तावित हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि घास मद की भूमि पर आवास निर्माण की अनुमति नहीं है, लेकिन कथित रूप से रिकॉर्ड में बदलाव कर इसे आबादी भूमि दर्शाया गया और स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा गया।
मामले में नगर पंचायत के नेता प्रतिपक्ष अभिषेक राय ने अधिकारियों से शिकायत की है। उनका आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में कूट रचना कर शासकीय भूमि को आबादी भूमि के रूप में दर्ज किया गया। शिकायत के बाद गठित जांच टीम दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब नगर पंचायत अध्यक्ष नारायण कुर्रे ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि जिन स्थानों पर वर्तमान में आवास बने हुए हैं, वहां कई परिवार पिछले 10 वर्षों से निवास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में भी आबादी भूमि की खरीदी-बिक्री हुई थी, जिसकी जांच होनी चाहिए।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि शिकायत सामने नहीं आती तो क्या कथित रूप से गलत दस्तावेजों के आधार पर आवासों की स्वीकृति मिल जाती। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
नगर पंचायत बाराद्वार के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और यह मामला राजस्व विभाग से जुड़ा हुआ है। जिला स्तर पर गठित जांच टीम जांच कर रही है तथा रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस कथित अनियमितता को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।


