रायपुर, 15 अक्टूबर 2026
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को जांजगीर-चांपा जिले की पावन धार्मिक नगरी शिवरीनारायण पहुंचकर सपत्नीक भगवान नर-नारायण के दर्शन किए। उन्होंने मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने प्रार्थना की कि छत्तीसगढ़ निरंतर विकास और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ की आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र है। यह पावन भूमि माता शबरी की अनन्य भक्ति और प्रभु श्रीराम से जुड़ी स्मृतियों को अपने भीतर संजोए हुए है। यहां आकर मन को विशेष शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन हम सभी का दायित्व है।
मुख्यमंत्री ने भगवान नर-नारायण की पूजा-अर्चना करते हुए प्रदेश के प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सद्भाव, भाईचारा और आपसी प्रेम बना रहे तथा राज्य निरंतर खुशहाली की दिशा में आगे बढ़े।
गौ माता को गुड़ और केला खिलाकर किया पूजन
भगवान नर-नारायण के दर्शन के बाद मुख्यमंत्री श्री साय शिवरीनारायण स्थित मठ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने गौ माता को गुड़ और केला खिलाया तथा माल्यार्पण कर श्रद्धापूर्वक पूजन किया। मुख्यमंत्री ने गौ सेवा को सनातन संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जीवनशैली, कृषि परंपरा और लोकजीवन में गौ माता का विशेष स्थान है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने मठ मंदिर परिसर में संतों और श्रद्धालुओं से आत्मीय मुलाकात भी की। उन्होंने कहा कि हमारे मठ-मंदिर और धार्मिक स्थल केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये पीढ़ियों से समाज को संस्कार, सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ते आए हैं।
जगन्नाथ मंदिर में भी की पूजा-अर्चना
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय के साथ शिवरीनारायण स्थित जगन्नाथ मंदिर में भी दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से प्रदेशवासियों के स्वस्थ, सुखी और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवरीनारायण की धार्मिक परंपरा छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के पावन संगम के समीप स्थित यह नगरी सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रही है। यहां के मंदिर, धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाती हैं।
माता शबरी की भक्ति से जुड़ी है शिवरीनारायण की पहचान
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिवरीनारायण का नाम आते ही माता शबरी की अनन्य भक्ति और प्रभु श्रीराम के प्रति उनके अगाध प्रेम का स्मरण होता है। यह पावन भूमि भक्ति, समर्पण और सामाजिक समरसता का संदेश देती है। शिवरीनारायण की आध्यात्मिक विरासत छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास और लोकआस्था का महत्वपूर्ण अध्याय है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों की पहचान को मजबूत करने तथा समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी साझा जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, राजेश्री महंत रामसुंदर दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।



