रायपुर, 15 अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बुधवार को माता शबरी की पावन नगरी शिवरीनारायण में महानदी के तट पर आयोजित चित्रोत्पला गंगा महाआरती में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय के साथ श्रद्धा और भक्तिभाव से महाआरती की तथा प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और कल्याण की कामना की। महानदी के तट पर दीपों की जगमगाहट, वैदिक मंत्रोच्चार और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को भव्य आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को शिवरीनारायण महोत्सव और शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माता शबरी की पुण्यभूमि में महानदी के पावन तट पर चित्रोत्पला गंगा महाआरती में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य का अवसर है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में सहभागिता प्रदेश की आस्था, परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति समाज के गहरे जुड़ाव को दर्शाती है।

महानदी केवल नदी नहीं, छत्तीसगढ़ की आस्था और सभ्यता की पहचान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महानदी छत्तीसगढ़ की गंगा मैया है। यह केवल जल की धारा नहीं, बल्कि प्रदेश की आस्था, संस्कृति, सभ्यता और जनजीवन की अविरल धारा है। सदियों से महानदी छत्तीसगढ़ की धरती को सींचती आई है। इसने प्रदेश की कृषि और अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है तथा इसके तटों पर हमारी समृद्ध संस्कृति और सभ्यता विकसित हुई है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देशभर में गंगा मैया के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव है, उसी प्रकार छत्तीसगढ़वासियों के मन में महानदी के प्रति भी अगाध श्रद्धा है। लेकिन नदियों के प्रति आस्था तभी सार्थक होगी, जब हम उनके संरक्षण, संवर्धन और स्वच्छता को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी मानेंगे।

‘जल है तो कल है’, जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि जल है तो कल है। पानी के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। प्रकृति से प्राप्त जल अनमोल धरोहर है और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना हम सभी का दायित्व है।

उन्होंने कहा कि आज किए गए जल संरक्षण के प्रयास ही भविष्य की पीढ़ियों का जीवन तय करेंगे। इसलिए जल संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे जनभागीदारी से व्यापक जनआंदोलन बनाना होगा।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से वर्षा जल की एक-एक बूंद सहेजने की अपील करते हुए कहा कि गांवों, शहरों, घरों और सार्वजनिक परिसरों में जहां भी संभव हो, वर्षा जल संचयन की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। जब प्रत्येक परिवार और नागरिक जल बचाने को अपना संकल्प बनाएगा, तभी जल संरक्षण का अभियान सफल होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जल संचय अभियान को मिली गति

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए जनभागीदारी का अभियान बनाया है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में जल संचय-जनभागीदारी अभियान के माध्यम से वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए देशभर में प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ सहित विभिन्न अवसरों पर जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए नागरिकों को इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। उनकी प्रेरणा से छत्तीसगढ़ में भी जल संरक्षण के प्रयासों को और व्यापक बनाया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक गांव, नगर और परिवार को जल संचय की मुहिम से जोड़ने का आह्वान किया, ताकि जल संरक्षण जन-जन का संकल्प बन सके।

वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और जल संचय के लिए कई अच्छे प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार इन नवाचारों को और विस्तार देने की जरूरत है। उन्होंने पांच प्रतिशत मॉडल सहित विभिन्न जल संरक्षण नवाचारों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि वर्षा का पानी बहकर बाहर निकलने के बजाय जमीन के भीतर पहुंचे, इसके लिए वैज्ञानिक और स्थानीय उपाय अपनाने होंगे। सोकपिट निर्माण, हैंडपंपों के आसपास भूजल पुनर्भरण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और स्थानीय जल संरचनाओं का संरक्षण जैसे प्रयास जल संचय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों और शहरों में भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार जल संचयन की व्यवस्था विकसित करने से भूजल स्तर में सुधार होगा और भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने परंपरागत तालाबों, कुओं और अन्य जल स्रोतों को हमारी विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इनके संरक्षण और पुनर्जीवन की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही प्रदेशवासियों से नदियों, तालाबों और कुओं को स्वच्छ रखने तथा जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने की अपील की।

नदियों के प्रति श्रद्धा के साथ संरक्षण का भी लें संकल्प

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महानदी सहित छत्तीसगढ़ की सभी नदियां प्रदेश की जीवनरेखा हैं। नदियों के प्रति हमारी धार्मिक श्रद्धा हमें उनके संरक्षण के लिए भी प्रेरित करती है।

उन्होंने कहा कि चित्रोत्पला गंगा महाआरती जैसे आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने के साथ प्रकृति के प्रति हमारे दायित्व का भी स्मरण कराते हैं। इस पवित्र अवसर पर सभी को संकल्प लेना चाहिए कि वे जल का अपव्यय नहीं करेंगे, जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाएंगे और संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार काम कर रही है, लेकिन इस अभियान की वास्तविक शक्ति समाज की भागीदारी है। शासन और समाज मिलकर प्रयास करेंगे, तभी नदियों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल सुनिश्चित किया जा सकेगा।

माता शबरी की नगरी शिवरीनारायण की सांस्कृतिक पहचान को मिलेगी मजबूती

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवरीनारायण भगवान श्रीराम और माता शबरी की भक्ति से जुड़ी पावन भूमि है। यह नगरी छत्तीसगढ़ की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां आयोजित धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और विरासत से जोड़ने का काम करते हैं।

उन्होंने कहा कि शिवरीनारायण जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की विशिष्ट पहचान को और मजबूत करना आवश्यक है। इन स्थलों की आध्यात्मिक गरिमा और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए उनकी पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

तोखन साहू और ओ.पी. चौधरी ने भी दिया संरक्षण और संस्कृति का संदेश

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि महानदी के तट पर महाआरती का आयोजन धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं को सशक्त बनाता है। नदियां हमारी जीवनरेखा हैं और उन्हें प्रदूषण से बचाकर स्वच्छ एवं अविरल बनाए रखना सभी का सामूहिक दायित्व है।

जिले के प्रभारी एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि शिवरीनारायण की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। भगवान श्रीराम और माता शबरी की भक्ति से जुड़ी इस पावन नगरी को देश के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों में विशिष्ट पहचान दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

महानदी के पावन तट पर आयोजित चित्रोत्पला गंगा महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भक्तिमय वातावरण में संपन्न महाआरती के दौरान श्रद्धालुओं ने महानदी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और जल एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश ग्रहण किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, जांजगीर-चांपा सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, नारायण चंदेल, महंत रामसुंदर दास सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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