रायपुर, 20 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक डब्ल्यूआरएस मैदान में विजयादशमी महोत्सव हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हजारों लोगों की उपस्थिति में धनुष-बाण से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, न्याय और मानवता के मार्ग पर अडिग रहने का शाश्वत संदेश देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य का मार्ग कितना भी कठिन क्यों न हो, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। जब भी जीवन में सही और गलत के बीच चुनाव करने का अवसर आए, हमें हमेशा सत्य, न्याय और मानवता के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। व्यक्ति किसके साथ खड़ा है, यही उसके चरित्र और संस्कारों की वास्तविक पहचान है।
पांच दशकों से अधिक समय से चली आ रही है विजयादशमी की परंपरा
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रायपुर का डब्ल्यूआरएस मैदान पांच दशकों से अधिक समय से विजयादशमी उत्सव की गौरवशाली परंपरा का साक्षी रहा है। यहां प्रतिवर्ष रावण दहन के माध्यम से अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि विजयादशमी हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह पर्व नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज और राष्ट्र की वास्तविक शक्ति सत्य, सदाचार, एकता और न्याय में निहित होती है। हमारी सांस्कृतिक परंपराओं में समाहित ये मूल्य पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमें सही मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
प्रभु श्रीराम से छत्तीसगढ़ का गहरा आत्मीय संबंध
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़वासियों के लिए विजयादशमी का विशेष महत्व है, क्योंकि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ छत्तीसगढ़ के वनांचलों में लंबा समय व्यतीत किया था।
उन्होंने कहा कि इसी कारण छत्तीसगढ़ की लोकआस्था, संस्कृति और जनजीवन में भगवान श्रीराम का विशेष स्थान है। प्रभु श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा, धैर्य, साहस और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा का अनुपम उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने के बावजूद भगवान श्रीराम अपने कर्तव्य और धर्म के मार्ग से विचलित नहीं हुए। उनका जीवन विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, मर्यादा और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
शक्ति से बड़ी होती है सत्य और धर्म की सामर्थ्य
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रावण के पास अपार सैन्य शक्ति, अस्त्र-शस्त्र और महाबली योद्धाओं की विशाल सेना थी, जबकि प्रभु श्रीराम ने वनवासियों और वानर सेना को संगठित कर उसका सामना किया और विजय प्राप्त की।
यह प्रसंग बताता है कि संसाधनों और बाहुबल से कहीं अधिक बड़ी शक्ति सत्य, धर्म, दृढ़ संकल्प और सामूहिक पुरुषार्थ की होती है।
उन्होंने कहा कि रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन भी महत्वपूर्ण संदेश देता है। अधर्म का साथ देने वाला व्यक्ति चाहे कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः उसे अपने कर्मों के परिणामों का सामना करना पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों का वास्तविक अनुसरण केवल उनकी आराधना करने में नहीं, बल्कि उनके जीवन मूल्यों को अपने आचरण में उतारने में है। कमजोर और जरूरतमंद का साथ देना, न्याय के पक्ष में खड़े होना तथा अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना ही रामराज्य की मूल भावना है।
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख कर आतंकवाद के विरुद्ध भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति को बताया महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध भारत की नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से देश ने राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है।
उन्होंने कहा कि भारत ने स्पष्ट किया है कि देश की सुरक्षा और नागरिकों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास स्थापित करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। बस्तर सहित प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में विश्वास, विकास और खुशहाली का वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। शांति और सुरक्षा के साथ विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है।
रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा को बताया करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की सिद्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, तप और लंबे संघर्ष से जुड़े संकल्प की पूर्ति का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि 22 जनवरी 2024 का दिन भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा। इसी दिन अयोध्या में नवनिर्मित भव्य श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी। यह देश और दुनिया के करोड़ों रामभक्तों के लिए भावुक, गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर था।
श्रीरामलला दर्शन योजना से 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को लाभ
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेशवासियों की धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए श्रीरामलला दर्शन योजना प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश के 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम जाकर भगवान श्रीराम के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और भगवान श्रीराम से जुड़े धार्मिक स्थलों का इसमें विशिष्ट स्थान है। राज्य सरकार प्रदेश की संस्कृति, आस्था और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।
समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागिता का आह्वान
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की पुनः शुभकामनाएं देते हुए सभी से प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सत्य, न्याय, सद्भाव, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलते हुए प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना चाहिए। सभी के सामूहिक प्रयासों से एक शांतिपूर्ण, समरस, सुरक्षित और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जा सकता है।
कार्यक्रम को राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा और रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक श्री कुलदीप सिंह जुनेजा, श्री जयंती भाई पटेल, श्री सूर्यकांत राठौर, आयोजन समिति के प्रमुख श्री जी. स्वामी, नेशनल क्लब एवं आयोजन समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।



