वॉशिंगटन, 7 जून 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर अपना रुख दोहराते हुए कहा है कि किसी भी तरह की राहत या प्रतिबंधों में ढील अंतिम समझौते के बाद ही संभव होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक ठोस और स्थायी समझौता नहीं हो जाता, तब तक ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध जारी रहेंगे।
NBC News के कार्यक्रम “Meet the Press” में बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान सकारात्मक कदम उठाता है, जिम्मेदार व्यवहार करता है और वार्ता सही दिशा में आगे बढ़ती है, तभी उसकी फ्रीज की गई विदेशी संपत्तियों को जारी करने पर विचार किया जा सकता है।
लेबनान को समझौते में शामिल करने की कोई मांग नहीं
ट्रंप ने कहा कि किसी संभावित अंतरिम समझौते में लेबनान को शामिल करने की उनकी कोई मांग नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान से जुड़ा क्षेत्रीय तनाव 100वें दिन में प्रवेश कर चुका है। हालांकि 8 अप्रैल को संघर्षविराम लागू हुआ था, लेकिन स्थायी शांति समझौते की दिशा में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
“ईरान अभी समझौते के लिए तैयार नहीं”
ट्रंप ने शुक्रवार को भी कहा था कि ईरान ने अब तक अमेरिका समर्थित प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। उनके अनुसार, ईरानी नेतृत्व की कठोर सोच और अनिच्छा बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
उन्होंने कहा, “वे बेहद दृढ़ और गर्वीले हैं, लेकिन अब उन्हें ऐसे फैसले लेने होंगे जिनकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।” ट्रंप के मुताबिक ईरान के पास अब सीमित विकल्प बचे हैं, जिसके कारण वार्ता प्रक्रिया लंबी खिंच रही है।
दशकों पुरानी नीति पर उठाए सवाल
ट्रंप ने ईरान पर वर्षों तक बिना पर्याप्त जवाबदेही के अपनी रणनीति पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि करीब 47 वर्षों तक ईरान बिना किसी प्रभावी रोक-टोक के अपनी नीतियों पर चलता रहा, जबकि इस मुद्दे का समाधान काफी पहले हो जाना चाहिए था।
ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी प्रशासन और वैश्विक नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इस दिशा में पहले कदम उठाने चाहिए थे। उनके इस बयान को ईरान के प्रति अमेरिका की कड़ी नीति और भविष्य की वार्ताओं के लिए स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
