मुंबई, 21 सितंबर 2026

देश के प्रमुख औद्योगिक समूह टाटा ग्रुप में Tata Sons और Tata Trusts के बीच एन. चंद्रशेखरन के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया है। 17 सितंबर को Tata Sons के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को एक और पांच साल के कार्यकाल के लिए चेयरमैन बनाए रखने का फैसला किया था।

इस फैसले पर Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा ने आपत्ति जताई है। Tata Trusts का कहना है कि चंद्रशेखरन ने अगस्त में अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद पुनर्नियुक्ति नहीं लेने का निर्णय बोर्ड को बताया था और यह निर्णय अंतिम माना जाना चाहिए। Trusts ने 17 सितंबर की बोर्ड कार्रवाई की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं।

बोर्ड के फैसले पर Tata Trusts की आपत्ति

17 सितंबर की बैठक में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर बोर्ड ने समर्थन दिया, जबकि नोएल टाटा ने इसका विरोध किया। Tata Trusts ने दावा किया है कि कंपनी के Articles of Association के तहत Trusts के नामित निदेशकों की भूमिका इस तरह के फैसले में महत्वपूर्ण है।

Tata Trusts के पास Tata Sons में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यही वजह है कि चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति और Tata Sons की प्रस्तावित लिस्टिंग से जुड़े मुद्दे विवाद के केंद्र में हैं।

कानूनी मोर्चे पर भी आमने-सामने दोनों पक्ष

विवाद बढ़ने के साथ दोनों पक्षों की ओर से वरिष्ठ वकीलों की कानूनी राय सामने आई है। अभिषेक मनु सिंघवी Tata Trusts का पक्ष रख रहे हैं, जबकि हरीश साल्वे Tata Sons और एन. चंद्रशेखरन की ओर से कानूनी स्थिति पर दलील दे रहे हैं।

अब विवाद का मुख्य केंद्र चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति की वैधता, Tata Trusts के अधिकार और Tata Sons के नियामकीय ढांचे से जुड़े सवाल हैं। आगे बोर्ड स्तर पर होने वाली प्रक्रिया या संभावित कानूनी कार्रवाई से मामले की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

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