बस्तर दशहरा में निभाई गई भीतर रैनी की रस्म, 600 साल पुरानी परंपरा में आधी रात को चुराया गया विशालकाय विजय रथ
बस्तर दशहरा की करीब 600 साल पुरानी भीतर रैनी की रस्म बुधवार देर रात निभाई गई। माड़िया समुदाय के लोग आठ चक्कों वाले विशालकाय विजय रथ को कुम्हड़ाकोट के जंगल ले गए। गुरुवार को नवा खानी की रस्म के बाद रथ वापस मां दंतेश्वरी मंदिर लाया जाएगा।
बस्तर दशहरा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कार्यकाल में 618 साल पुरानी परंपरा के तहत दंतेवाड़ा से जगदलपुर रवाना हुईं मां दंतेश्वरी की डोली
बस्तर दशहरा की 618 साल पुरानी परंपरा के तहत मां दंतेश्वरी की पावन डोली रविवार को दंतेवाड़ा से जगदलपुर के लिए रवाना हुई। डंकिनी पुल पर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। वहीं, फूल रथ का पहिया और मुख्य लकड़ी टूटने से परिक्रमा प्रभावित हुई। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं
बस्तर दशहरा में अनोखी बेल पूजा की परंपरा, जोड़ी बेल फल से जुड़ी है मां दंतेश्वरी और मां माणिकेश्वरी की कथा
बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी बेल पूजा की रस्म सरगीपाल गांव में पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। मान्यता है कि जोड़ी बेल फल के माध्यम से मां दंतेश्वरी और मां माणिकेश्वरी को पर्व में शामिल होने का न्योता दिया जाता है।
तिरंगा यात्रा के दूसरे दिन माँ दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना, विजय शर्मा बोले- बस्तर की जनता के सहयोग से नक्सलवाद का हुआ खात्मा
दंतेवाड़ा में तिरंगा यात्रा के दूसरे दिन उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने माँ दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर यात्रा का शुभारंभ किया। विजय शर्मा ने जिले के 211 वीर बलिदानी जवानों को नमन करते हुए कहा कि बस्तर की जनता, समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों के



