रायपुर, 18 सितंबर 2026
छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘सेवा के संकल्प’ के तहत राजस्व प्रशासन को डिजिटल बनाकर प्रदेश के भू-स्वामियों को भूमि संबंधी जटिल प्रक्रियाओं और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत देने की दिशा में कदम उठाए हैं। भुईयां और भू-नक्शा पहल के माध्यम से प्रदेश के 20,298 गांवों के खसरा और 19,723 गांवों के भू-नक्शों का कंप्यूटरीकरण पूरा किया जा चुका है। इससे भूमि संबंधी शुद्ध और प्रमाणिक अभिलेख डिजिटल माध्यम से उपलब्ध हो रहे हैं।
इसके साथ ही प्रदेश की 158 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम तैयार किए जा चुके हैं। इससे महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेजों के गुम होने या खराब होने की आशंका कम हुई है और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की व्यवस्था मजबूत हुई है।
भूमि विवादों के समाधान के लिए ‘ई-कोर्ट’ व्यवस्था
राजस्व प्रशासन में डिजिटल सुधारों की कड़ी में 105 उप-पंजीयक कार्यालयों को भुईयां पोर्टल से जोड़ा गया है। यहां ‘ऑटो नामांतरण’ (Auto Mutation) प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद क्रेता के नाम नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है।
भूमि विवादों के समाधान के लिए ‘ई-कोर्ट’ व्यवस्था भी शुरू की गई है। इसके माध्यम से नागरिक घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। साथ ही मामले से जुड़ी जानकारी और पेशी की तारीख की सूचना SMS के माध्यम से मोबाइल पर प्राप्त की जा सकती है।
WhatsApp चैटबॉट पर मिलेंगे खसरा और बी-1 जैसे दस्तावेज
भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को ऑटो व्यपवर्तन के माध्यम से अधिक सरल बनाया गया है और इसे 15 दिनों के भीतर पूरा करने की व्यवस्था की गई है। वहीं, गाइडलाइन दरों के निर्धारण की प्रक्रिया को भी स्वचालित किया गया है।
किसानों की सुविधा के लिए पटवारी एवं उप-पंजीयक के डिजिटल हस्ताक्षर वाली डिजिटल किसान ऋण पुस्तिका पोर्टल पर स्वतः तैयार हो रही है। इसे भविष्य में सिविल कोर्ट से जोड़ने की योजना भी बताई गई है।
भूमि संबंधी सेवाओं को आम नागरिकों तक आसानी से पहुंचाने के लिए खसरा और बी-1 जैसे जरूरी दस्तावेज अब WhatsApp चैटबॉट के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार से राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता, सुशासन और नागरिक सुविधा को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।



