बिलासपुर,31 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रिटायर्ड शासकीय कर्मचारियों और पेंशनरों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक के 32 महीने के पेंशन एरियर का भुगतान करने का आदेश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार के उस परिपत्र को भेदभावपूर्ण मानते हुए निरस्त कर दिया, जिसमें 1 जनवरी 2006 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित पेंशन का वास्तविक लाभ 1 सितंबर 2008 से देने का प्रावधान किया गया था।
यह मामला बस्तर निवासी 80 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रधान पाठक ज्ञानदत्त मिश्रा द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सरकार को अपने-अपने हिस्से की वित्तीय जिम्मेदारी निभाते हुए 120 दिनों के भीतर एरियर का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता ज्ञानदत्त मिश्रा अविभाजित मध्य प्रदेश में शिक्षा विभाग में कार्यरत थे। राज्य पुनर्गठन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला और वे 31 जुलाई 2003 को प्रधान पाठक के पद से सेवानिवृत्त हुए।
राज्य सरकार ने छठवें वेतनमान के आधार पर पेंशन पुनरीक्षण नियम-2009 लागू किए थे, लेकिन 31 अगस्त 2009 के परिपत्र के जरिए 1 जनवरी 2006 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित पेंशन का वास्तविक लाभ 1 सितंबर 2008 से देने का निर्णय लिया गया, जिससे 32 महीने का एरियर रोक दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि केवल सेवानिवृत्ति की तारीख के आधार पर पेंशनरों के साथ अलग-अलग व्यवहार करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि महंगाई का प्रभाव सभी पेंशनरों पर समान रूप से पड़ता है, इसलिए केवल कटऑफ तारीख के आधार पर पूर्व और बाद में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बीच भेदभाव करना संवैधानिक रूप से उचित नहीं है।



