रायपुर, 3 नवंबर 2026

छत्तीसगढ़ को आने वाले वर्षों में सुशासन का आदर्श, आर्थिक रूप से सशक्त और सामाजिक समरसता में अग्रणी राज्य बनाने के लिए सभी नागरिकों की सहभागिता जरूरी है। प्रदेश के युवाओं, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और जनजातीय समाज के सामूहिक प्रयासों से छत्तीसगढ़ विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह बात राज्यपाल रमेन डेका ने मंगलवार को नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव-2026 के द्वितीय दिवस समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही।

राज्यपाल ने प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना दिवस की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने अपने गठन के 26 वर्षों की यात्रा पूरी कर ली है। यह अवसर प्रदेश की गौरवशाली विकास यात्रा को याद करने के साथ भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का भी है।

उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का सपना देखने वाले सभी पुरखों को नमन किया और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का विशेष स्मरण किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में अनेक आशाओं और चुनौतियों के बीच छत्तीसगढ़ का गठन हुआ था। पिछले ढाई दशकों में प्रदेश ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और अधोसंरचना के क्षेत्र में विकास का मजबूत आधार तैयार किया है।

बस्तर में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण

राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास के लिए शांति और सुरक्षा पहली आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ में विशेष रूप से बस्तर अंचल में शांति स्थापना और विकास के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं।

उन्होंने कहा कि कभी हिंसा और कठिन परिस्थितियों से प्रभावित रहे क्षेत्रों में आज सड़क, बिजली, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। स्कूल खुल रहे हैं और स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

आजीविका मिशन के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्यपाल ने सुरक्षा बलों के साहस, समर्पण और बलिदान को नमन करते हुए हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों का अभिनंदन किया।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और विकास के वातावरण को स्थायी बनाने के लिए सुरक्षा के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के अवसरों का निरंतर विस्तार जरूरी है।

जल, जंगल और खनिज संपदा का संरक्षण जरूरी

राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां की वन संपदा, नदियां, जलस्रोत और खनिज संसाधन प्रदेश की बड़ी ताकत हैं। विकास की गति बढ़ाने के साथ इनका संरक्षण करना भी सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने विशेष रूप से जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि आने वाले समय में जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इसके लिए जल संरक्षण को जनभागीदारी आधारित अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है।

नदियों, तालाबों, आर्द्रभूमियों और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं।

शिक्षा, तकनीक और कौशल विकास से तैयार होगी नई पीढ़ी

राज्यपाल ने कहा कि किसी भी परिवार और राज्य का भविष्य उसके बच्चों और युवाओं पर निर्भर करता है। इसलिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीक और कौशल विकास में निवेश करना बेहद जरूरी है।

उन्होंने अबूझमाड़ और जगरगुंडा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में शैक्षिक नगर विकसित करने की योजना को प्रदेश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी विद्यालय तक पहुंचना कठिन था, वहां अब आधुनिक शिक्षा की सुविधाएं विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

औद्योगिक निवेश और रोजगार से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था

राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि आजीविका किसी भी परिवार की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में किए जा रहे प्रयास छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देंगे।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में सेमीकंडक्टर इकाई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डाटा सेंटर पार्क जैसी परियोजनाएं आधुनिक औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ युवाओं तक पहुंचाया जा रहा है। मुद्रा योजना, स्टार्टअप और कौशल विकास कार्यक्रम युवाओं को उद्यमशीलता की ओर प्रोत्साहित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों के विकास से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुरक्षा, शांति, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

किसान, श्रमिक और जनजातीय समाज छत्तीसगढ़ की असली ताकत

राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की समृद्ध संस्कृति, मेहनतकश नागरिकों और प्राकृतिक संपदा से है। प्रदेश के किसान, मजदूर और जनजातीय समाज ने अपने परिश्रम, परंपराओं और जीवन मूल्यों से राज्य की विशिष्ट पहचान बनाई है।

उन्होंने कहा कि विकास का वास्तविक उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाना है। ग्रामीण क्षेत्रों, दूरस्थ अंचलों और वंचित समुदायों की विकास यात्रा में भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।

छोटे-छोटे प्रयासों से आएगा बड़ा सामाजिक बदलाव

राज्यपाल रमेन डेका ने प्रदेशवासियों से विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में ऐसा कोई न कोई कार्य जरूर करना चाहिए, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आए।

उन्होंने कहा कि जीवन में केवल ट्रांजेक्शन नहीं, बल्कि ट्रांसफार्मेशन लाने वाले कार्यों को महत्व देना चाहिए। छोटे-छोटे सकारात्मक प्रयास मिलकर बड़े सामाजिक बदलाव का आधार बनते हैं।

राज्योत्सव हमारी सांस्कृतिक विविधता और लोक परंपराओं का उत्सव : राजेश अग्रवाल

समारोह को संबोधित करते हुए संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां के जनजातीय समाज की गौरवशाली परंपराओं, लोकजीवन, प्रकृति के साथ सामंजस्य और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता से है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अनेक भाषाओं, बोलियों, लोकगीतों, लोकनृत्यों और परंपराओं का सुंदर संगम है। यहां की विविधता प्रदेश की सबसे बड़ी शक्ति है।

उन्होंने कहा कि राज्य उत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रदेश की कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और विकास की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच है। बस्तर की माटी से लेकर सरगुजा की वादियों और मैदानी अंचलों तक प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है।

जनजातीय संस्कृति छत्तीसगढ़ की पहचान का आधार स्तंभ

संस्कृति मंत्री ने कहा कि राज्योत्सव में विभिन्न जिलों से आए शिल्पकारों, बुनकरों और लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने तथा उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति छत्तीसगढ़ की पहचान का आधार स्तंभ है। इन परंपराओं का संरक्षण, संवर्धन और भावी पीढ़ियों तक हस्तांतरण करना सभी की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय समाज के सामाजिक सम्मान, आर्थिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। लोक कलाकारों के प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति भवन में अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने और सम्मान प्राप्त करने का अवसर मिलना प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

लोक संस्कृति को पर्यटन और आजीविका से जोड़ने पर जोर

राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश की लोक संस्कृति और पर्यटन को आपस में जोड़कर रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि देश-दुनिया से छत्तीसगढ़ आने वाले पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता के साथ स्थानीय लोकजीवन, खानपान, संगीत, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित हों। इसके लिए समन्वित प्रयास किए जाने चाहिए।

पर्यटन के विस्तार से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक मंच मिलेगा। उन्होंने आधुनिकता के दौर में स्थानीय भाषाओं, बोलियों, लोकगीतों और परंपराओं के संरक्षण को भी आवश्यक बताया।

राज्योत्सव की थीम ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’

संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने स्वागत उद्बोधन में राज्योत्सव-2026 के आयोजन के उद्देश्यों और प्रमुख गतिविधियों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष राज्योत्सव की थीम ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ रखी गई है। राज्योत्सव के माध्यम से प्रदेश की कला, साहित्य, संस्कृति, पर्यटन तथा जनकल्याणकारी योजनाओं को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है।

विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों में राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की प्राथमिकताओं की जानकारी दी जा रही है। आयोजन में स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश की विविध लोक परंपराओं का प्रदर्शन किया जा रहा है।

समारोह में सांसद सुनील सोनी, विधायक पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू और अनुज शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, कला एवं साहित्य जगत की विभूतियां, लोक कलाकार, मीडिया प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

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