गरियाबंद,1 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के केरावाहारा गांव में पिछले एक महीने से ग्रामीणों में दहशत का कारण बने तेंदुए को वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए केज ट्रैप (पिंजरा) लगाया, जिसमें 1 अगस्त 2026 की सुबह तेंदुआ बिना किसी नुकसान के सुरक्षित पकड़ लिया गया। इस कार्रवाई से संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष का बड़ा खतरा टल गया।
वन विभाग के अनुसार, तेंदुआ पिछले कई दिनों से रिहायशी इलाकों, विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में देखा जा रहा था। इससे पहले वह पालतू मवेशियों पर हमला भी कर चुका था, जिसके बाद विभाग ने क्षेत्र में विशेष निगरानी शुरू करते हुए सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए थे।
वनमंडलाधिकारी श्री ससिगानंदन के., उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक श्री वरुण जैन तथा वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश वर्मा के निर्देशन में ग्राम जोवा और केरावाहारा में केज ट्रैप लगाए गए थे। साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित लेपर्ड रेस्क्यू टीम को आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात किया गया था। अभियान के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सह मुख्य वन्यजीव वार्डन से आवश्यक अनुमति और दिशा-निर्देश भी प्राप्त किए गए थे।
रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम ने तेंदुए की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उसके स्वास्थ्य और व्यवहार की निगरानी शुरू कर दी है। मौके पर भीड़ न जुटे, इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था भी की गई।
वन विभाग ने बताया कि तेंदुए का तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। जांच में उसकी शारीरिक स्थिति, किसी संभावित चोट या बीमारी तथा उसे प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने की उपयुक्तता का आकलन किया जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और तेंदुए या किसी अन्य वन्यजीव की गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल नजदीकी वन अमले को सूचित करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मानव जीवन और वन्यजीवों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।



