रायपुर,1 नवंबर 2026

छत्तीसगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, लोकपरंपराओं और कला-संगीत का भव्य उत्सव छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 का आज 1 नवंबर से नवा रायपुर में आगाज होने जा रहा है। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर स्थित राज्योत्सव मैदान में 1 से 3 नवंबर तक तीन दिवसीय आयोजन किया जाएगा। इस दौरान प्रदेश की लोककला, जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक नृत्यों के साथ बॉलीवुड के प्रसिद्ध कलाकारों की संगीतमय प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

राज्योत्सव का शुभारंभ आज शाम 6 बजे केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री मनसुख मांडविया के मुख्य आतिथ्य में होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय करेंगे। समारोह में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव और श्री विजय शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

2 नवंबर को राज्यपाल रमेन डेका होंगे मुख्य अतिथि

राज्योत्सव के दूसरे दिन 2 नवंबर को राज्यपाल श्री रमेन डेका मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल करेंगे। इस दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत पर आधारित ‘मैं अयोध्या हूं’ नाट्य मंचन भी किया जाएगा।

3 नवंबर को अमित शाह की मौजूदगी में होगा समापन

तीन दिवसीय राज्योत्सव का समापन 3 नवंबर को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। इस अवसर पर राज्य अलंकरण समारोह भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा।

बॉलीवुड कलाकारों की प्रस्तुतियां रहेंगी खास आकर्षण

राज्योत्सव के तीनों दिन मुख्य मंच पर देश के प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

  • 1 नवंबर: बॉलीवुड की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका पलक मुच्छल अपनी सुरीली आवाज से दर्शकों का मनोरंजन करेंगी। इससे पहले रायपुर के कलाकार अनुराग शर्मा की प्रस्तुति होगी।
  • 2 नवंबर: ‘मैं अयोध्या हूं’ नाट्य मंचन के बाद बॉलीवुड गायिका स्वास्ति मेहुल अपनी संगीतमय प्रस्तुति देंगी।
  • 3 नवंबर: पद्मश्री उषा बारले की पंथी प्रस्तुति के बाद प्रसिद्ध बॉलीवुड गायक अभिजीत भट्टाचार्य अपने लोकप्रिय गीतों से राज्योत्सव का समापन करेंगे।

शिल्पग्राम में दिखेगी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति

मुख्य मंच के साथ शिल्पग्राम भी तीन दिनों तक लोककला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गुलजार रहेगा। यहां प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से कार्यक्रम शुरू होंगे। तीन दिनों में कुल 30 स्थानीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी।

शिल्पग्राम में पंडवानी, पंथी, सुआ नृत्य, ओडिसी, कथक, लोकमंच, लोकगीत, भजन, सूफी संगीत, गजल और आदिवासी लोकनृत्य की प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आने वाले कलाकार अपनी कला और प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

1 नवंबर: पंडवानी, लोकसंगीत और शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियां

राज्योत्सव के पहले दिन शिल्पग्राम में नौ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। शिवेन्द्र मंडावी लोकसंगीत एवं गिटार वादन प्रस्तुत करेंगे। राजीव श्रीवास्तव का रिदम बैंड और संतोष कुमार सिंहा का फ्यूजन बैंड भी प्रस्तुति देंगे।

इसके अलावा चेतन देवांगन और दुर्गा साहू पंडवानी गायन, अनुष्का सुल्ताना शास्त्रीय नृत्य, रजनी रजक लोकमंच एवं ढोलामारू, वंदिता साहू लोकसंगीत और पायल साहू लोकमंच की प्रस्तुति देंगी।

2 नवंबर: ओडिसी, कथक और सुआ नृत्य से सजेगा मंच

दूसरे दिन शिल्पग्राम में 11 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित होंगी। प्रसन्ना अवस्थी लोकसंगीत एवं नृत्य, सुष्मिता दास ओडिसी नृत्य और समप्रिया पूजा निषाद पंडवानी गाथा प्रस्तुत करेंगी।

अंकित निर्मलकर सूफी, गजल एवं सुगम गायन, मिलवंतीन बाई सुआ नृत्य और मेघा बोस ताम्रकार पारंपरिक लोकसंगीत की प्रस्तुति देंगी। इसके अलावा आंचल पाण्डेय और विनीता त्रिपाठी कथक नृत्य, रुखमनी दीवान एवं तेजराम साहू लोकमंच तथा आदित्य मिश्रा बैंड अपनी प्रस्तुति देगा।

3 नवंबर: पंथी, आदिवासी लोकनृत्य और भजनों का संगम

राज्योत्सव के अंतिम दिन शिल्पग्राम में दस सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। आस्था भट्ट भजन गायन, आरती बारले पंथी नृत्य और राकेश सेन लोकमंच प्रस्तुत करेंगे।

दिनेश कुमार जांगड़े पंथी नृत्य, पूर्णिमा साहू जसगीत एवं जगराता भजन और अभिषेक सोनकर आदिवासी लोकसंगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति देंगे। इसके अलावा दीपाली पाण्डेय कथक समूह नृत्य, वृद्धुमन वचस्पति भारती सूफी संगीत, अनुष्णा रॉय चौधरी कथक नृत्य और आनंदकुमार पाण्डेय नाट्य प्रस्तुति देंगे।

स्थानीय कलाकारों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव केवल राज्य स्थापना दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस आयोजन के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का व्यापक मंच मिलेगा।

पंडवानी, पंथी, सुआ नृत्य और आदिवासी लोककलाओं को विशेष स्थान देकर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को प्रोत्साहित किया जाएगा। तीन दिनों तक पारंपरिक लोककलाओं और आधुनिक संगीत का संगम नवा रायपुर को उत्सव के रंगों से सराबोर करेगा।

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