नक्सल भय का अंत, अबूझमाड़ में फिर जीवंत हुई ‘घोटुल’ की गौरवशाली परंपरा
नक्सल प्रभाव में कमी और बेहतर सुरक्षा माहौल के बीच अबूझमाड़ में घोटुल की पारंपरिक संस्कृति फिर जीवंत होने लगी है। अंदरूनी गांवों में ग्रामीण प्राकृतिक सामग्रियों से घोटुल तैयार कर रहे हैं, जहां युवा लोकगीत, नृत्य, संगीत, सामाजिक अनुशासन और परंपराएं सीख रहे हैं।
दिल्ली के मंच पर जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा, तीजन बाई की स्मृति में हुई विशेष प्रस्तुति
दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी लोक परंपरा की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पद्म विभूषण तीजन बाई की स्मृति को समर्पित इस विशेष प्रस्तुति के साथ IHC लोक संगीत सम्मेलन 2026 का शुभारंभ हुआ।



