रायपुर, 10 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी लोक परंपरा ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित इंडिया हैबिटेट सेंटर के मंच पर अपनी जीवंत उपस्थिति दर्ज कराई। महान पंडवानी कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति को समर्पित विशेष प्रस्तुति के साथ IHC लोक संगीत सम्मेलन 2026 का शुभारंभ हुआ।

इस प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की लोक कला और सांस्कृतिक परंपरा को दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखा।

पंडवानी ने बांधा समां

इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टाइन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में पंडवानी कलाकार प्रभा यादव ने पारंपरिक संगीतकारों के साथ प्रस्तुति दी। महाभारत की कथाओं पर आधारित पंडवानी में कथा, गायन, संवाद, लय और अभिनय का अनूठा संयोजन देखने को मिला।

प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की कलात्मक ताकत और व्यापकता को दर्शकों के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

तीजन बाई के योगदान को किया याद

कार्यक्रम में तीजन बाई की कला यात्रा और पंडवानी को मिली राष्ट्रीय पहचान को विशेष रूप से याद किया गया। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा से निकली पंडवानी को देश और दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचाने में तीजन बाई का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा।

उन्होंने अपनी विशिष्ट प्रस्तुति शैली के माध्यम से पंडवानी को नई पहचान दिलाई और इसे भारतीय लोक प्रदर्शन कलाओं की प्रमुख विधाओं में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लोक परंपरा में जीवंत हैं सांस्कृतिक स्मृतियां

तीजन बाई को समर्पित प्रस्तुति के माध्यम से उनके कला जीवन के साथ उस परंपरा को भी याद किया गया, जिसमें कथावाचन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का माध्यम रहा है।

इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश ने कहा कि भारत की लोक कलाएं देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें पीढ़ियों से चली आ रही कहानियां, परंपराएं और मूल्य सुरक्षित हैं। लोक कलाकारों और परंपराओं को राष्ट्रीय राजधानी में मंच देना इन विरासतों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय

धरसींवा विधायक एवं छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार अनुज शर्मा ने कहा कि पंडवानी छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण लोक कला है। तीजन बाई ने इसे गांवों से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में पंडवानी जैसी छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा का सम्मान होना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।

अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा ने कहा कि भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास, सामूहिक स्मृति और जीवन-दर्शन सुरक्षित है। ऐसे आयोजन इन परंपराओं को नए दर्शकों और नई पीढ़ी से जोड़ने का काम करते हैं।

देशभर की लोक परंपराओं का साझा मंच

IHC लोक संगीत सम्मेलन भारत के विभिन्न हिस्सों की लोक संगीत, कथावाचन और प्रदर्शन परंपराओं को एक मंच पर लाने वाला वार्षिक आयोजन है। इसका उद्देश्य देश की विविध लोक कलाओं को सामने लाना और पारंपरिक कलाकारों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का अवसर देना है।

इस वर्ष सम्मेलन की शुरुआत छत्तीसगढ़ की पंडवानी और तीजन बाई की स्मृति को समर्पित प्रस्तुति से होना विशेष महत्व रखता है।

दिल्ली के प्रमुख सांस्कृतिक मंच पर हुई इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि भारत की लोक कलाएं केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान की सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक ऊर्जा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

अन्वेषा कला केंद्र पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से भारत की शास्त्रीय और लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन, दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शैक्षणिक गतिविधियों के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।

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