रायपुर,18 अक्टूबर 2026
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार नारी शक्ति के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। महिलाओं की प्रगति केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और प्रदेश की प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख माताओं-बहनों को आर्थिक मजबूती मिल रही है, वहीं प्रदेश की 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न गरबा एवं नवरात्रि महोत्सवों में शामिल होकर प्रदेशवासियों को नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने कालीबाड़ी स्थित मां काली मंदिर में दर्शन-पूजन कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय मंडी परिसर में श्री कच्छ कड़वा पाटीदार समाज द्वारा आयोजित श्री पाटीदार नवरात्रि महोत्सव, भानपुरी में आयोजित गरबा समारोह, गोवर्धन नगर में श्री कच्छ गुर्जर क्षत्रिय समाज के नवरात्रि महोत्सव तथा अमलीडीह क्षेत्र में आयोजित ढोलिडा रास गरबा-2026 में भी शामिल हुए।
गरबा आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का संगम
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नवरात्रि का पर्व शक्ति आराधना, नारी सम्मान और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। इसी भावना के अनुरूप राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना हमें साहस, संयम, सकारात्मकता और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। यह पर्व समाज में प्रेम, सद्भाव और समरसता की भावना को मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गरबा केवल नृत्य नहीं, बल्कि मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति है। गुजरात से प्रारंभ हुई गरबा की परंपरा आज पूरे देश में उत्साह और उमंग के साथ मनाई जाती है। यह भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता का सुंदर उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि जब अलग-अलग समाज और समुदाय एक साथ मिलकर त्योहार मनाते हैं, तो आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता की भावना मजबूत होती है। छत्तीसगढ़ में भी विभिन्न समाज अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजते हुए प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने गरबा महोत्सवों में माताओं, बहनों और बेटियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि नारी शक्ति की सहभागिता से ऐसे आयोजन और अधिक सुंदर एवं गरिमामय बनते हैं। नवरात्रि हमें महिलाओं के सम्मान के साथ उनके प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी स्मरण कराती है।
महतारी वंदन योजना से 68 लाख महिलाओं को आर्थिक संबल
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से लगातार कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत प्रदेश की लगभग 68 लाख माताओं-बहनों के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि सीधे अंतरित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की स्वतंत्रता को भी मजबूत कर रही है। महिलाएं इस राशि का उपयोग दैनिक आवश्यकताओं, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, बचत और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तो परिवार में खुशहाली बढ़ती है और बच्चों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ की प्रत्येक महिला को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें और वह प्रदेश के विकास में अपनी पूरी क्षमता के साथ भागीदारी कर सके।
छत्तीसगढ़ की 14 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश की 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की महिलाओं की मेहनत, लगन, उद्यमशीलता और आर्थिक सामर्थ्य का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ गांवों और समाज की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के हाथों में आर्थिक सामर्थ्य आने से परिवारों में खुशहाली आती है। इससे बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य बेहतर होते हैं तथा समाज में सकारात्मक बदलाव की गति तेज होती है।
उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार महिलाओं के कौशल विकास, आजीविका संवर्धन, स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
शक्ति आराधना की पावन भूमि है छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की पावन धरती है। यह मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी जैसी आराध्य देवियों की भूमि है। प्रदेश में सदियों से शक्ति उपासना और देवी आराधना की गौरवशाली परंपरा रही है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि के दौरान दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी, डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी, रतनपुर में मां महामाया और चंद्रपुर में मां चंद्रहासिनी के दरबार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। गांवों और शहरों में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाते हैं तथा पूरा प्रदेश माता की भक्ति में सराबोर हो जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परंपरा प्रदेश की गहरी धार्मिक आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की विशिष्ट पहचान है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में प्रकृति, आस्था, लोकजीवन और अध्यात्म का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि हमारे तीज-त्योहार और धार्मिक परंपराएं पीढ़ियों को आपस में जोड़ती हैं। इन परंपराओं को सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
विकास भी, विरासत भी के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश के समग्र विकास के साथ संस्कृति, आस्था और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। देवी शक्तिपीठों और अन्य आस्था केंद्रों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने के साथ उन्हें प्रदेश की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की शक्ति और भविष्य की प्रेरणा है। आधुनिक और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ प्रदेश की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बनाना सरकार का उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि और गरबा जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों और आपसी सद्भाव को मजबूत करते हैं तथा समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने मां दुर्गा से प्रार्थना करते हुए कहा कि माता रानी की कृपा सभी प्रदेशवासियों पर बनी रहे। हर घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आए तथा छत्तीसगढ़ शांति, समृद्धि और विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।
इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, देवजी भाई पटेल, जयंती पटेल और जगदीश पटेल सहित विभिन्न समाजों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।



