रायपुर, 20 सितंबर 2026
छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के नागरिकों को सुगम, त्वरित और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत कर रही है। राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग द्वारा शुरू की गई ‘वसुंधरा’ परियोजना के माध्यम से प्रदेश के पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों का संपूर्ण डिजिटलीकरण, संरक्षण और प्रमाणीकरण किया जाएगा। इससे नागरिकों को राजस्व अभिलेखों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है।
दंतेवाड़ा मॉडल से मिली नई दिशा
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव दंतेवाड़ा के सफल मॉडल पर आधारित है। दंतेवाड़ा में पिछले एक वर्ष के दौरान 12 हजार से अधिक नागरिकों ने कियोस्क सेवाओं का लाभ उठाया। वहीं 15 हजार से अधिक जाति प्रमाण-पत्र केवल एक से दो दिनों में जारी किए गए। इसके साथ ही सैकड़ों विवादित मामलों के त्वरित निराकरण में मदद मिली और अभिलेखों में छेड़छाड़ का कोई मामला सामने नहीं आया।
12.89 करोड़ पृष्ठों का होगा डिजिटलीकरण
दंतेवाड़ा के अनुभव से प्रेरणा लेते हुए अब पूरे राज्य में लगभग 12 करोड़ 89 लाख पृष्ठों के विभिन्न राजस्व अभिलेखों को डिजिटल करने का विस्तृत खाका तैयार किया गया है।
इसमें 5.68 करोड़ पृष्ठ खसरा पांचसाला के डिजिटलीकरण पर 22.72 करोड़ रुपए, 2.94 करोड़ पृष्ठ B-1 रिकॉर्ड पर 11.77 करोड़ रुपए, 2.49 करोड़ पृष्ठ नामांतरण एवं संशोधन पंजी पर 9.98 करोड़ रुपए, 53.16 लाख पृष्ठ मिसल पंजी पर 2.13 करोड़ रुपए और 47.29 लाख पृष्ठ अधिकार अभिलेख पर 1.89 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रावधान है।
इसके अतिरिक्त निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा, नजूल शीट और व्यवर्तन पंजी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा।
65.41 करोड़ रुपए की पूंजीगत लागत
परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए 65.41 करोड़ रुपए की एकमुश्त पूंजीगत लागत (CAPEX) और 50 लाख रुपए प्रति वर्ष परिचालन व्यय (OPEX) निर्धारित किया गया है। वित्तीय व्यवस्था राज्य के अधोसंरचना मद और केंद्र सरकार की DILRMP 3.0 योजना से की जाएगी।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से अगले तीन महीनों के भीतर वसुंधरा पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद कार्यदायी एजेंसियों का चयन कर एक वर्ष के भीतर सभी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और सत्यापन का कार्य पूरा करने की योजना है।
AI और ब्लॉकचेन से सुरक्षित होंगे अभिलेख
‘वसुंधरा’ परियोजना में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। AI आधारित OCR, डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और स्मार्ट सर्च इंजन की मदद से दशकों पुराने रिकॉर्ड को भी तेजी से खोजा जा सकेगा।
वहीं अभिलेखों में धोखाधड़ी और हेरफेर रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा, डिजिटल हस्ताक्षर तथा यूनिक QR और बारकोड प्रणाली लागू की जाएगी।
कुछ मिनटों में मिलेंगे प्रमाणित अभिलेख
परियोजना के पूरी तरह लागू होने के बाद नकल प्राप्त करने में लगने वाला वर्तमान 3 से 7 दिनों का समय घटकर कुछ मिनटों तक आने का लक्ष्य है। यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध कराने की योजना है।
नागरिक वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, लोक सेवा केंद्र और कियोस्क के माध्यम से घर बैठे प्रमाणित अभिलेख प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और अधिकारियों के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
‘वसुंधरा’ परियोजना के जरिए छत्तीसगढ़ में डिजिटल गवर्नेंस, पारदर्शिता और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है। परियोजना के माध्यम से भूमि संबंधी अभिलेखों को सुरक्षित, प्रमाणित और आसानी से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।



