रायपुर, 05 सितंबर 2026

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक किसान ने आधुनिक कृषि तकनीक का इस्तेमाल कर बंजर जमीन को कमाई का जरिया बना दिया है। लैलूंगा विकासखंड के ग्राम झारआमा के किसान एतवार साय पैकरा ने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की खेती कर सफलता की नई मिसाल पेश की है।

कभी अनुपयोगी और बंजर पड़ी रहने वाली जमीन पर खेती कर किसान ने 187 क्विंटल का उत्पादन हासिल किया और कुल 4.25 लाख रुपये की बिक्री की।

ग्राफ्टेड खेती से मिली बेहतर पैदावार

ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन में नीचे जंगली बैंगन का रूटस्टॉक और ऊपर टमाटर या हाइब्रिड बैंगन का सायन लगाया जाता है। यह तकनीक पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक रोग-प्रतिरोधी मानी जाती है।

ग्राफ्टेड पौधे अधिक पानी, लंबे समय तक सूखा और भारी बारिश जैसी परिस्थितियों को भी अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से सहन कर सकते हैं।

ड्रिप और मल्चिंग तकनीक अपनाई

किसान की जमीन गांव से दूर जंगल के समीप स्थित थी। साथ ही वहां सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं थे, जिससे खेती करना चुनौतीपूर्ण था। उद्यानिकी विभाग की सलाह पर किसान ने पहले भूमि का समतलीकरण कराया।

इसके बाद सिंचाई के लिए ड्रिप तकनीक और खेत में मल्चिंग पद्धति को अपनाया। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वर्ष 2025-26 में उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्राफ्टेड सब्जियों की खेती शुरू की।

187 क्विंटल उत्पादन, 4.25 लाख की बिक्री

किसान ने टमाटर से 87 क्विंटल उत्पादन प्राप्त किया, जिसकी बिक्री से 1.75 लाख रुपये की आय हुई। वहीं बैंगन से 100 क्विंटल उत्पादन हुआ और इसकी बिक्री से 2.50 लाख रुपये प्राप्त हुए।

इस तरह कुल 187 क्विंटल उत्पादन से 4.25 लाख रुपये की बिक्री हुई। खेती में किसान की कुल लागत करीब 1.45 लाख रुपये रही, जबकि उन्हें 2.80 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

अभी और उत्पादन की उम्मीद

ग्राफ्टेड बैंगन की फसल से वर्तमान में भी उत्पादन जारी है। आने वाले समय में करीब 150 से 200 क्विंटल अतिरिक्त उत्पादन होने की संभावना जताई गई है। इससे किसान को लगभग 4 से 5 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है।

एतवार साय पैकरा की सफलता से गांव के अन्य किसान भी आधुनिक कृषि तकनीक और ग्राफ्टेड सब्जियों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। यह उदाहरण दिखाता है कि सही तकनीक, विभागीय मार्गदर्शन और बेहतर कृषि प्रबंधन से अनुपयोगी जमीन को भी लाभकारी खेती में बदला जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts