रायपुर, 24 अगस्त 2026
रक्षाबंधन पर बहनों को महतारी वंदन की सौगात
रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए यह पर्व आर्थिक संबल और आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लेकर आया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले महिलाओं के खातों में पहुंचने से बहनों की त्योहार की खुशियों में एक नया रंग जुड़ गया।
किसी बहन ने इस राशि से भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदने की तैयारी की, तो किसी ने उपहार लेने की योजना बनाई। वहीं कई महिलाएं नियमित रूप से मिलने वाली राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बचत में भी कर रही हैं।
राखी से पहले मिली सौगात, बहनों ने कहा- धन्यवाद विष्णु भैया
बलरामपुर की श्रीमती ज्योति सोनी के लिए महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले विशेष सौगात बनकर आई। खाते में एक हजार रुपये पहुंचने पर उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि विष्णु भैया ने रक्षाबंधन से पहले खाते में राशि भेजकर उनकी खुशियां बढ़ा दी हैं।
ज्योति सोनी इस राशि से भाई के लिए राखी, मिठाई और त्योहार की आवश्यक सामग्री खरीदने के साथ अपनी बेटी के भविष्य के लिए भी बचत कर रही हैं। उन्होंने अपनी पुत्री का सुकन्या समृद्धि योजना में खाता खुलवाकर उसमें नियमित रूप से राशि जमा करना शुरू किया है।
सूरजपुर की श्रीमती उषा पांडे भी इस बार रक्षाबंधन पर भाई के लिए राखी, मिठाई और उपहार खरीदने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन से ठीक पहले महतारी वंदन की किस्त मिलने से उनकी खुशियां दोगुनी हो गई हैं।
सूरजपुर की ही श्रीमती कुंती साहू के लिए भी योजना की किस्त त्योहार की खुशियों को सहज बनाने वाली सौगात बनी है। बढ़ती महंगाई के बीच राखी, मिठाई और उपहार की व्यवस्था में योजना की राशि उनके लिए सहारा बनी है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को आत्मीयता से ‘विष्णु भैया’ कहते हुए आभार व्यक्त किया।
आर्थिक संबल से बढ़ रहा महिलाओं का आत्मविश्वास
महतारी वंदन योजना महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर निर्णय लेने का अवसर दे रही है। घरेलू खर्च, बच्चों की जरूरतों, त्योहारों और परिवार से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों में महिलाओं की भागीदारी अब अपने स्वयं के आर्थिक संबल से और मजबूत हो रही है।
योजना की राशि का उपयोग महिलाएं अपनी दैनिक आवश्यकताओं के साथ शिक्षा, बचत और भविष्य की योजनाओं में भी कर रही हैं। इससे महिलाओं के आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन को नई मजबूती मिल रही है।
कृषि उत्पादों से राखियां, आत्मनिर्भरता की नई डोर
रक्षाबंधन के अवसर पर बलरामपुर जिले की महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियां भी आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी लक्ष्मी समूह की महिलाओं ने धान, गेहूं और मक्का जैसे स्थानीय कृषि उत्पादों का रचनात्मक उपयोग कर आकर्षक राखियां तैयार की हैं।
समूह की महिलाओं द्वारा अब तक करीब 7,020 राखियां तैयार की जा चुकी हैं, जिनकी बिक्री से लगभग 60 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है। रक्षाबंधन के अवसर पर इन राखियों की मांग लगातार बनी हुई है।
ये राखियां सी-मार्ट में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। स्थानीय उत्पादों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में भी स्टॉल लगाया जा रहा है।
स्थानीय संसाधनों से रोजगार और आय के नए अवसर
महिला समूहों की यह पहल बताती है कि स्थानीय संसाधनों को महिलाओं के हुनर और रचनात्मकता से जोड़कर किस तरह रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। राखी के हर धागे में ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, स्थानीय उत्पादों का मूल्य संवर्धन और आत्मनिर्भरता का संदेश जुड़ा हुआ है।
रक्षाबंधन से आत्मनिर्भरता तक, नई तस्वीर गढ़ रही मातृशक्ति
एक ओर महतारी वंदन योजना की नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं को परिवार और त्योहार की खुशियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर दे रही है, वहीं दूसरी ओर महिला स्व-सहायता समूह स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़कर स्वरोजगार की नई राह बना रहे हैं।
इस तरह रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर बंधने वाला प्रेम का धागा नहीं, बल्कि सम्मान, स्वाभिमान, आर्थिक संबल और आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक बन रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश की बहनों में यह विश्वास मजबूत हो रहा है कि सरकार उनके साथ खड़ी है। रक्षाबंधन से पहले मिली महतारी वंदन की किस्त और स्थानीय महिला समूहों द्वारा तैयार राखियां इसी विश्वास की दो जुड़ी हुई तस्वीरें हैं—एक तरफ बहनों की खुशियां और दूसरी तरफ उनके आत्मनिर्भर बनने का संकल्प।



