राज्योत्सव 2026 में वन विभाग की खास प्रदर्शनी, तुंगल कैफे से कांगेर घाटी तक दिखेगी बस्तर की नई पहचान
रायपुर, 31 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में इस बार बदलते बस्तर की तस्वीर देखने को मिलेगी। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा ‘बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़’ थीम पर विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति के बाद बढ़ती पर्यटन गतिविधियों, स्थानीय लोगों को मिल रहे रोजगार के अवसरों और वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को प्रदर्शित किया जाएगा।
राज्योत्सव की थीम ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ के अनुरूप प्रदर्शनी में महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसरों पर विशेष जोर रहेगा। प्रदर्शनी के माध्यम से बताया जाएगा कि किस तरह बस्तर में पर्यटन, वन संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।
पर्यटन से बदल रही बस्तर की तस्वीर, दिखेंगे प्रमुख पर्यटन स्थल
प्रदर्शनी में बस्तर के उन क्षेत्रों की झलक दिखाई जाएगी, जहां पहले नक्सलवाद के कारण पर्यटन गतिविधियां सीमित थीं। अब इन क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय पर्यटन से जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।
इसके तहत कांगेर घाटी की जंगल सफारी और गुफाओं, कोण्डागांव की पुष्पाल घाटी, जो स्टार गेजिंग के लिए प्रसिद्ध है, इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मट्टीमरका और सुकमा के तुंगल डैम को मॉडल के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
इसके अलावा धुड़मारास के धुरवा होमस्टे और देवगुड़ियों के संरक्षण के जरिए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन से जुड़ी आजीविका की जानकारी भी दी जाएगी।
तुंगल कैफे चला रहीं मुख्यधारा में लौटीं 10 महिलाएं
प्रदर्शनी में सुकमा का तुंगल कैफे महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल के रूप में प्रदर्शित होगा। यहां मुख्यधारा में लौटीं 10 महिलाएं मिलकर कैफे का संचालन कर रही हैं और अपने लिए रोजगार का नया रास्ता तैयार कर रही हैं।
वहीं, कांगेर घाटी में चक्रीय निधि से उपलब्ध कराए गए 35 जिप्सी वाहनों के माध्यम से लगभग 200 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। तुंगल में युवा नौका विहार और कयाकिंग जैसी गतिविधियों से आय अर्जित कर रहे हैं। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड के रूप में भी रोजगार मिल रहा है।
प्रदर्शनी में इन उदाहरणों के माध्यम से बताया जाएगा कि किस तरह पर्यटन वनांचल के लोगों की आजीविका का नया माध्यम बन रहा है।
काले हिरण की वापसी और गिद्ध संरक्षण के प्रयास भी होंगे प्रदर्शित
वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी पहल भी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण होगी। इसमें बारनवापारा में दशकों बाद काले हिरण की वापसी, औरापानी में गिद्ध संरक्षण और छत्तीसगढ़ के पहले रामसर स्थल कोपरा जलाशय के संरक्षण के प्रयासों को प्रमुखता से दिखाया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 26 अप्रैल 2026 को मन की बात कार्यक्रम में बारनवापारा में काले हिरण की वापसी का उल्लेख किया था।
इसके अलावा धमतरी के ठेमली द्वीप को इको-पर्यटन केंद्र के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं, ‘गजरथ यात्रा’ के माध्यम से मानव-हाथी द्वंद्व के प्रबंधन और मानव एवं वन्यजीवों के सह-अस्तित्व का संदेश दिया जाएगा।
प्रदर्शनी में प्रदेश के राजकीय पशु वन भैंसा, राजकीय वृक्ष साल, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना और राजकीय तितली के रूप में अनुमोदित ऑरेंज ओकलीफ के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
वनोपज से वनवासियों की आय बढ़ाने की पहल की मिलेगी जानकारी
प्रदर्शनी में लघु वनोपज के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से वनवासियों की आय बढ़ाने के प्रयासों को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
इसके लिए लघु वनोपज प्रसंस्करण इकाई, छत्तीसगढ़ हर्बल्स और छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड की गतिविधियों की जानकारी दी जाएगी। दर्शक यहां विभिन्न वन उत्पादों के बारे में जान सकेंगे और उनकी खरीदारी भी कर सकेंगे।
युवाओं और बच्चों के लिए होगी क्विज प्रतियोगिता
राज्योत्सव में युवाओं और बच्चों की भागीदारी बढ़ाने के लिए वन, वन्यजीव और बस्तर पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। सही जवाब देने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार भी दिए जाएंगे।
इसके साथ ही प्रदर्शनी में क्यूआर कोड की सुविधा उपलब्ध होगी। इसे स्कैन करके दर्शक अपने मोबाइल पर प्रदेश के इको-पर्यटन स्थलों, वहां पहुंचने के रास्तों, उपलब्ध सुविधाओं और बुकिंग से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
मंडप के तीन द्वारों में दिखेगी आस्था, जनजातीय गौरव और टाइगर बॉय की झलक
वन विभाग का यह मंडप लगभग 88 गुणा 30 फीट क्षेत्र में तैयार किया जाएगा। इसमें तीन विशेष द्वार बनाए जाएंगे, जो बस्तर की आस्था, संस्कृति और पहचान को प्रदर्शित करेंगे।
इनमें दंतेवाड़ा के वन मंदिर, जगदलपुर की जनजातीय गौरव वाटिका और बस्तर के प्रसिद्ध ‘टाइगर बॉय’ चेंदरू की स्मृति में चेंदरू द्वार शामिल होंगे।
इसके अलावा मंडप में लगाई जाने वाली एलईडी स्क्रीन पर बस्तर में आए बदलाव और विकास की कहानी पर आधारित लघु फिल्में भी दिखाई जाएंगी। इस तरह राज्योत्सव में आने वाले दर्शकों को बस्तर के पर्यटन, संस्कृति, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के रोजगार और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी विभिन्न पहलों को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।



