रायपुर, 9 अक्टूबर 2026

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने, निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने और शहरी विकास को गति देने के लिए भूमि उपयोग नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। भारत सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने संबंधी सुधारों के अनुरूप राज्य में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में बदलाव किए गए हैं।

वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में किए गए इन सुधारों का उद्देश्य भूमि उपयोग संबंधी प्रक्रियाओं को सरल, स्पष्ट और लचीला बनाना है। नई व्यवस्था में नेगेटिव लिस्ट मॉडल अपनाया गया है, जिससे आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों में अनुमत्य गतिविधियों का दायरा बढ़ेगा। इससे नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।

शहरी नियोजन सुधारों के लिए छत्तीसगढ़ को मिले 885 करोड़ रुपये

भारत सरकार की विशेष सहायता योजना (SASCI) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को शहरी नियोजन सुधारों के लिए दो वित्तीय वर्षों में कुल 885 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मिली है। इसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 में 800 करोड़ रुपये और 2025-26 में 85 करोड़ रुपये शामिल हैं।

राज्य सरकार ने अब भूमि उपयोग नियमों में बदलाव कर नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अनावश्यक प्रतिबंधों को कम करने और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

नेगेटिव लिस्ट मॉडल से भूमि उपयोग होगा अधिक लचीला

संशोधित नियमों के तहत विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों में उन गतिविधियों को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है, जो संबंधित क्षेत्र के लिए अनुपयुक्त हैं। इसके अलावा अन्य अनुमत्य गतिविधियों के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

इससे भूमि उपयोग के नियम अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक होंगे। बदलती आर्थिक परिस्थितियों, नई व्यावसायिक गतिविधियों और नागरिकों की जरूरतों के अनुसार भूमि का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, त्रिपुरा, मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित अन्य राज्यों ने भी अपने विकास नियंत्रण विनियमों में नेगेटिव लिस्ट मॉडल अपनाया है। छत्तीसगढ़ ने भी इसी दिशा में भूमि उपयोग नियमन को अधिक आधुनिक और विकासोन्मुख बनाने की पहल की है।

आवासीय क्षेत्रों में अस्पताल, स्कूल और कार्यालयों की अनुमति

संशोधित नियमों की प्रमुख विशेषता मिश्रित भूमि उपयोग (Mixed Use) को प्रोत्साहित करना है। नई व्यवस्था के अंतर्गत अस्पताल और स्कूल जैसी जन-आवश्यक सुविधाओं को आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में अनुमत्य किया गया है। इसी प्रकार कार्यालयों को भी इन भूमि उपयोग श्रेणियों में अनुमति दी गई है।

इस बदलाव से लोगों को अपने निवास स्थान के आसपास शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही, घर और कार्यस्थल के बीच दूरी कम होने से आवागमन के समय तथा यातायात के दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल और श्रमिक आवास की सुविधा

औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों और श्रमिकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संशोधित प्रावधानों में हॉस्टल, डॉर्मिटरी और श्रमिक आवास जैसी सुविधाओं को अनुमत्य गतिविधियों में शामिल किया गया है।

इससे औद्योगिक इकाइयों के आसपास कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी। कार्यस्थल के नजदीक रहने की सुविधा से श्रमिकों के दैनिक आवागमन में आसानी होगी और औद्योगिक क्षेत्रों में सामाजिक अधोसंरचना के विकास को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

इसके अलावा, मनोरंजन भूमि उपयोग श्रेणी में श्मशान एवं कब्रिस्तान से संबंधित आवश्यक गतिविधियों को भी अनुमत्य किया गया है। इससे नागरिक सुविधाओं, सामाजिक आवश्यकताओं और आर्थिक गतिविधियों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया है।

निवेश और रोजगार के अवसरों को मिलेगा प्रोत्साहन

तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ भूमि उपयोग की जरूरतें भी बदल रही हैं। आवासीय क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता, व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार और औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक सुविधाओं का विकास आधुनिक शहरी नियोजन के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि इन सुधारों से भूमि उपयोग संबंधी नियम सरल होंगे, विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सुविधा मिलेगी और अनुपालन संबंधी बोझ कम होगा। इससे उद्यमियों तथा निवेशकों को लाभ मिलने और राज्य में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को मिलेगी मजबूती

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और निवेश अनुकूल वातावरण तैयार करने पर जोर दे रही है। भूमि उपयोग नियमों में संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

नई व्यवस्था से छत्तीसगढ़ में शहरी नियोजन को आधुनिक और विकासोन्मुख बनाने, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने तथा निवेश के नए अवसर विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह पहल वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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