रायपुर, 13 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) की कार्यप्रणाली और नियम आधारित टेंडर प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें CGMSC पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
पूरा मामला टेंडर प्रक्रिया से जुड़ा था। एक ठेकेदार की शिकायत के बाद हाईकोर्ट ने CGMSC पर जुर्माना लगाया था। इसके खिलाफ CGMSC ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि CGMSC की ओर से कोई प्रक्रियात्मक गलती नहीं हुई थी।
अदालत के समक्ष यह स्पष्ट हुआ कि ठेकेदार ने आवेदन में जो आधिकारिक ईमेल आईडी उपलब्ध कराई थी, उसी पर समय रहते आवश्यक जानकारी और संदेश भेजे गए थे। इसके बावजूद ठेकेदार ने निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब नहीं दिया। ऐसे में नियमों के तहत ठेकेदार को टेंडर प्रक्रिया से बाहर किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस पूरे मामले में CGMSC की कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी। इसके आधार पर अदालत ने निगम पर लगाया गया 1 लाख रुपये का जुर्माना गलत मानते हुए निरस्त कर दिया।
इस फैसले को CGMSC की टेंडर और खरीद प्रक्रिया में नियमों के पालन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निगम ने कहा है कि वह आगे भी राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी खरीद प्रक्रियाओं को पारदर्शी एवं नियमबद्ध तरीके से संचालित करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।



