रायपुर,27 जुलाई 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में कोरबा के जल संरक्षण मॉडल का उल्लेख करते हुए ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने इसे वर्षा जल संरक्षण और जनभागीदारी का प्रभावी उदाहरण बताया। यह उपलब्धि कोरबा नगर पालिक निगम, जिला प्रशासन और जिलेवासियों के लिए गौरव का विषय है।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन और नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में शहर में जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के उद्देश्य से कई स्थायी और नवाचारी पहल की गई हैं। एसएएम-2.0 योजना के तहत 10 रिचार्ज वेल तैयार किए गए हैं, जिन्हें इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) के तकनीकी परामर्श से इंजेक्ट वेल पद्धति के आधार पर विकसित किया गया है। इनसे वर्षा का पानी सीधे भूगर्भ में पहुंचाकर भूजल स्तर बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।

नगर निगम ने 757 शासकीय भवनों और 971 निजी भवनों सहित कुल 1,728 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट स्थापित किए हैं। साथ ही भवन निर्माण अनुमति में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा विद्यालयों, आंगनबाड़ी भवनों, सामुदायिक भवनों, मंगल भवनों और अन्य सार्वजनिक भवनों में भी वर्षा जल संचयन की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। वर्तमान में 109 निर्माण कार्यों में यह प्रावधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

भूजल संरक्षण को मजबूत करने के लिए 95 अनुपयोगी, क्षतिग्रस्त और ध्वस्त बोरवेलों का चिन्हांकन कर उन्हें रिचार्ज संरचनाओं के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। इससे अनुपयोगी संसाधनों का उपयोग जल संरक्षण के लिए किया जाएगा।

जल संरक्षण के साथ-साथ जिले में पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने के लिए भी व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। कोरबा वनमंडल में इस वर्ष ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं 15 सितंबर तक ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत सघन वृक्षारोपण किया जा रहा है। ‘रन फॉर ग्रीन कोरबा’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से भी नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में कोरबा के जल संरक्षण मॉडल का उल्लेख इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर नवाचार, दूरदृष्टि और जनभागीदारी से किए गए प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रेरणा बन सकते हैं। यह मॉडल अब देश के अन्य नगरीय निकायों के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभर रहा है।

अंत में कलेक्टर कुणाल दुदावत और निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय ने नागरिकों से अपने घरों और संस्थानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं स्थापित करने, वर्षा जल संचयन को जनआंदोलन बनाने तथा अधिक से अधिक पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

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