रायपुर, 12 सितंबर 2026
छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय से ‘धान के कटोरे’ के रूप में रही है, लेकिन अब प्रदेश की कृषि पारंपरिक पहचान से आगे बढ़ते हुए आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण और नगदी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रही है। खेत में बेहतर उत्पादन से लेकर सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच बनाने की कोशिशों ने खेती को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बना दिया है।
धान के साथ नगदी फसलों का बढ़ता दायरा
छत्तीसगढ़ में किसान अब पारंपरिक धान की खेती के साथ अदरक, गेंदा फूल, बागवानी और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी अपना रहे हैं। कई किसान फूलों और अन्य नगदी फसलों से प्रति एकड़ बेहतर आमदनी हासिल कर रहे हैं।
युवा किसान मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को एक साथ जोड़कर खेती को आय के मुख्य केंद्र के रूप में विकसित कर रहे हैं। वहीं गांवों में ड्रोन, ऑटोमैटिक रीपर और आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग से श्रम लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी बदलाव दिखाई दे रहा है।
खरीफ उत्पादन में 17 और रबी में करीब 20 प्रतिशत वृद्धि
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार के ढाई वर्षों से अधिक के कार्यकाल में प्रदेश में खेती के रकबे के साथ उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खरीफ फसलों के उत्पादन में करीब 17 प्रतिशत और रबी फसलों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इस बदलाव में बेहतर बीज, उर्वरक, सिंचाई सुविधाओं और कृषि यंत्रीकरण तक किसानों की बढ़ती पहुंच की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कृषक उन्नति योजना से किसानों को आर्थिक संबल
किसानों को उत्पादन के साथ आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में कृषक उन्नति योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। खरीफ फसल के धान पर न्यूनतम समर्थन मूल्य से जुड़ी आदान सहायता के रूप में 24,73,762 किसानों को 13,289 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
वहीं गन्ना प्रोत्साहन योजना के तहत 1 करोड़ 3 लाख 34 हजार क्विंटल से अधिक गन्ने की खरीदी कर 32,955 किसानों को 64.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
खरीफ सीजन में 15.92 लाख से अधिक और रबी सीजन में 2.99 लाख किसानों को फसल बीमा के दायरे में शामिल किया गया है।
खरीफ 2023 से 2025 तक कृषक उन्नति योजना के तहत लगभग 25.52 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता राशि ट्रांसफर की गई है।
फसल विविधीकरण पर सरकार का जोर
धान छत्तीसगढ़ की मुख्य फसल है, लेकिन अब सरकार किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके तहत किसानों को प्रोत्साहन राशि के रूप में 15 हजार रुपये प्रति एकड़ दिए जा रहे हैं।
इस योजना के अंतर्गत अरहर, मूंग, उड़द और चना जैसी दलहन फसलों के साथ सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी और तिल जैसी तिलहन फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इसके अलावा मक्का, कपास और कोदो, कुटकी, रागी व बाजरा जैसे मोटे अनाजों की खेती करने वाले किसान भी इस प्रोत्साहन का लाभ उठा सकते हैं।
पीएम किसान सम्मान निधि से भी मिल रहा सहारा
किसानों की आय को मजबूत करने और जोखिम कम करने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्रदेश के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये सहित अब तक 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है।
तकनीक से कम हो रही लागत, बढ़ रही उत्पादकता
प्रदेश में खेती के क्षेत्र में नई तकनीकों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। गांवों में स्थापित फार्म मशीनरी बैंक से छोटे किसान महंगी कृषि मशीनें किराये पर ले पा रहे हैं। इससे खेती की लागत और श्रम दोनों को कम करने में मदद मिल रही है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों का विस्तार हुआ है। इससे पानी की बचत के साथ सिंचाई की दक्षता बढ़ रही है।
वहीं पिछले वर्ष 57 हजार से अधिक किसानों का प्राकृतिक खेती अपनाना कृषि के टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
बागवानी क्षेत्र में भी हुआ विस्तार
छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था में बागवानी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभर रही है। पिछले ढाई वर्षों में बागवानी का क्षेत्रफल 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
फल, सब्जी, मसाले और फूलों के साथ तेल पाम और बांस जैसी फसलों का विस्तार किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा कर रहा है।
अब चुनौती केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की उपज को बाजार, प्रसंस्करण और बेहतर मूल्य से जोड़ना भी है। इसी दिशा में पैक हाउस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी अधोसंरचनाओं के विकास की तैयारी की जा रही है।
खेत से बाजार तक बदल रही तस्वीर
छत्तीसगढ़ की कृषि अब धीरे-धीरे पारंपरिक खेती से निकलकर आधुनिक, विविधीकृत और बाजार केंद्रित कृषि व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। नगदी फसलों, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन के साथ तकनीक के इस्तेमाल ने किसानों के लिए आय के नए रास्ते खोले हैं।
बेहतर उत्पादन, आधुनिक तकनीक, सरकारी सहायता, फसल विविधीकरण और बाजार से जुड़ाव के जरिए प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। आने वाले समय में उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और बाजार व्यवस्था को मजबूत करना किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।



