रायपुर, 27 अगस्त 2026
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। संस्कृति मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय तथा महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर के चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने जिले के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों का मैदानी सर्वेक्षण और सूक्ष्म निरीक्षण किया।
विशेषज्ञ दल ने धनपुर, बेनीबाई, भस्मासुर टापू और शहरखेरवा स्थित पुरातात्विक धरोहरों की वर्तमान स्थिति, उनके ऐतिहासिक महत्व, संरक्षण की जरूरतों और भविष्य में विकास की संभावनाओं का अध्ययन किया।
मंत्री के निर्देश पर शुरू हुआ सर्वेक्षण
मंत्री राजेश अग्रवाल के जिले के प्रवास के दौरान कलेक्टर विजय दयाराम के. ने जिले में बिखरी प्राचीन पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता से उन्हें अवगत कराया था। इसके बाद मंत्री के निर्देश पर रायपुर से विशेषज्ञ दल को जिले के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों के सर्वेक्षण के लिए भेजा गया।
चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने किया मैदानी अध्ययन
रायपुर से पहुंचे विशेषज्ञ दल में पुरातत्ववेत्ता प्रभात कुमार सिंह, उत्खनन सहायक प्रवीण तिर्की, शोधकर्ता डॉ. राजीव जॉन मिंज और शोधकर्ता अमर भारद्वाज शामिल रहे।
दल ने विभिन्न स्थलों पर पहुंचकर पुरातात्विक अवशेषों, प्राचीन मूर्तियों और स्मारकों का बारीकी से अध्ययन किया तथा उनकी संरक्षण स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
धनपुर की प्राचीन धरोहरों का सूक्ष्म निरीक्षण
विशेषज्ञ दल ने ग्राम धनपुर स्थित प्राचीन मंदिर और वहां स्थापित ऐतिहासिक मूर्तियों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। मंदिर की संरचना, परिसर में मौजूद पुरातात्विक अवशेषों और उनके वर्तमान संरक्षण की स्थिति का जायजा लिया गया।
इसके अलावा धनपुर-धोबहर धरोहर केंद्र में संग्रहित प्राचीन मूर्तियों एवं अन्य पुरावशेषों का भी गहन अध्ययन किया गया। विशेषज्ञों ने इनके ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व, संरक्षण, रखरखाव और प्रभावी प्रबंधन की संभावनाओं पर विचार किया।
बेनीबाई और भस्मासुर टापू की धरोहरों का अध्ययन
सर्वेक्षण दल ने बेनीबाई और भस्मासुर टापू में संरक्षित प्राचीन मूर्तियों का भी बारीकी से निरीक्षण किया। यहां धरोहरों की वर्तमान स्थिति, रखरखाव और संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया गया।
शहरखेरवा में पुरातात्विक संभावनाओं की तलाश
विशेषज्ञ दल ने ऐतिहासिक महत्व के स्थल शहरखेरवा का भी विस्तृत सर्वेक्षण किया। यहां उपलब्ध पुरातात्विक अवशेषों और संभावित धरोहर स्थलों का निरीक्षण करते हुए क्षेत्र की पुरातात्विक संभावनाओं का अध्ययन किया गया।
कलेक्टर ने विशेषज्ञ दल के साथ की बैठक
क्षेत्रीय सर्वेक्षण और निरीक्षण पूरा होने के बाद कलेक्टर विजय दयाराम के. ने विशेषज्ञ दल के साथ बैठक कर सर्वेक्षण के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी ली।
बैठक में विभिन्न पुरातात्विक स्थलों की वर्तमान स्थिति, संरक्षण की जरूरतों और आवश्यक कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। कलेक्टर ने पुरातात्विक मूर्तियों और स्मारकों के संरक्षण एवं सुदृढ़ीकरण से संबंधित आवश्यक कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि धनपुर क्षेत्र में मौजूद प्राचीन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरें जिले की अमूल्य पहचान हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए योजनाबद्ध एवं व्यापक प्रयास किए जाएंगे, ताकि जिले की इस महत्वपूर्ण विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई जा सके।
संरक्षण के साथ पर्यटन विकास की भी संभावनाएं
धनपुर सहित जिले के अन्य पुरातात्विक स्थलों का यह सर्वेक्षण केवल धरोहर संरक्षण की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि भविष्य में इन स्थलों को सांस्कृतिक एवं विरासत पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकता है।
व्यवस्थित संरक्षण, बेहतर रखरखाव और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास से इन ऐतिहासिक स्थलों को जिले के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की संभावनाएं मजबूत होंगी।
पूरे फील्ड सर्वेक्षण के दौरान जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत धनपुर की टीम विशेषज्ञ दल के साथ मौजूद रही और सर्वेक्षण कार्य के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया।



