सागर 30june2026/ मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा सिविल अस्पताल में कथित चिकित्सकीय लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। इलाज के बाद डेढ़ साल के एक मासूम की आंखों की रोशनी चली जाने का आरोप अस्पताल के डॉक्टर पर लगा है। पीड़ित परिवार ने दावा किया है कि डॉक्टर ने आंखों में डालने वाली दवा की जगह गलती से दूसरी दवा डाल दी, जिससे बच्चे की आंखों की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।

जानकारी के अनुसार, ग्राम भूसा कमलपुर निवासी इन्द्राज विश्वकर्मा अपने एक वर्ष सात माह के बेटे विनय विश्वकर्मा को 29 मई को सर्दी और आंखों में लालपन की शिकायत होने पर बंडा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टर ने आई ड्रॉप, पैरासिटामोल सिरप, इंजेक्शन समेत अन्य दवाएं दीं। परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान आंखों में गलत दवा डाल दी गई, जिसके बाद बच्चे को तेज जलन और तकलीफ होने लगी।

बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे पहले जिला अस्पताल सागर और बाद में भोपाल स्थित एम्स रेफर किया गया। परिजनों का कहना है कि एम्स में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की आंखों की रोशनी पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

घटना के बाद पीड़ित पिता ने बंडा थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए संबंधित चिकित्सक के खिलाफ निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बताया कि वह डॉक्टर को पहचान सकते हैं, लेकिन उनका नाम नहीं जानते।

उधर, बंडा के सीबीएमओ डॉ. योगेन्द्र खटीक ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चे को पहले से कॉर्नियल अल्सरेशन, कुपोषण और आंखों में गंभीर संक्रमण था। इसी वजह से उसे उच्च स्तरीय उपचार के लिए जिला अस्पताल और फिर भोपाल एम्स रेफर किया गया था। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।

फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चे की आंखों की रोशनी जाने के पीछे चिकित्सकीय लापरवाही थी या कोई अन्य चिकित्सीय कारण।

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