बिलासपुर,12 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ में बाल देखभाल संस्थाओं से किशोरों के भागने की घटनाओं को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाया है। कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से बाल देखभाल संस्थाओं की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता को लेकर जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव से यह बताने को कहा है कि राज्य में 26 बाल देखभाल संस्थाओं में 156 सुरक्षा गार्डों की तैनाती के प्रस्ताव के लिए केंद्र की योजनाओं या दिशा-निर्देशों के तहत वित्तीय सहायता दी जा सकती है या नहीं।
दरअसल, महासमुंद के सरकारी ऑब्जर्वेशन होम से आठ किशोरों के भागने और बिलासपुर की संस्था से चार किशोरों के फरार होने की घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की पहल की है। इसके तहत 26 बाल देखभाल संस्थाओं में कुल 156 सिक्योरिटी गार्ड तैनात करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
राज्य सरकार ने 8 अगस्त 2026 को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पत्र भेजकर सुरक्षा गार्डों की तैनाती के लिए वित्तीय सहायता की मांग की थी। प्रस्ताव के अनुसार इसके लिए सालाना करीब 4.68 करोड़ रुपये के बजट की जरूरत होगी।
डिवीजन बेंच ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को केंद्र सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव को शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि 156 सुरक्षा गार्डों की तैनाती के लिए राज्य को किस तरह वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को होगी।



