रायपुर,17 अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ में संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया को सरल और किफायती बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों से आम नागरिकों को आर्थिक राहत मिल रही है। सेवा संकल्प अभियान के तहत बस्तर जिले के जगदलपुर निवासी श्रीमती नेत्र प्रभा जोशी को पारिवारिक हकत्याग की रजिस्ट्री में 81,648 रुपये की बचत हुई है। संयुक्त परिवार के सदस्यों के बीच पारिवारिक हकत्यागनामा के पंजीयन शुल्क को संपत्ति के बाजार मूल्य के 0.8 प्रतिशत से घटाकर मात्र 500 रुपये किए जाने से उनके परिवार को बड़ी आर्थिक राहत मिली।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए विभिन्न सुधार किए जा रहे हैं। इनमें पंजीयन प्रक्रिया का सरलीकरण, शुल्क में रियायत, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और आधुनिक पंजीयन कार्यालयों का विकास शामिल है। इन व्यवस्थाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से विभाग द्वारा सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत हितग्राहियों से संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव भी संकलित किए जा रहे हैं।

पारिवारिक हकत्याग की रजिस्ट्री में 81,648 रुपये की बचत

सेवा संकल्प अभियान के तहत अपना अनुभव साझा करते हुए श्रीमती नेत्र प्रभा जोशी ने बताया कि पारिवारिक हकत्याग से संबंधित रिलीज डीड (हकत्यागनामा) का पंजीयन कराने के दौरान उन्हें शासन द्वारा निर्धारित रियायती शुल्क का लाभ मिला। इस व्यवस्था के कारण उनके 81,648 रुपये बच गए। संपत्ति से जुड़े दस्तावेज के पंजीयन में हुई यह बचत उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक राहत साबित हुई।

श्रीमती जोशी के अनुसार, पंजीयन शुल्क में कमी आने से पारिवारिक संपत्ति से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों का पंजीयन कराना पहले की तुलना में अधिक किफायती हो गया है। इससे परिवार को अतिरिक्त खर्च से राहत मिली। उन्होंने इस सुविधा के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।

हकत्यागनामा के पंजीयन शुल्क में बड़ा बदलाव

राज्य शासन द्वारा संयुक्त परिवार के सदस्यों के बीच पारिवारिक हकत्यागनामा के पंजीयन शुल्क में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले ऐसे दस्तावेजों के पंजीयन पर संपत्ति के बाजार मूल्य का 0.8 प्रतिशत शुल्क निर्धारित था, जिसे घटाकर अब मात्र 500 रुपये कर दिया गया है।

इस बदलाव से पात्र परिवारों को पारिवारिक संपत्ति के अधिकारों के व्यवस्थापन और हकत्याग से संबंधित दस्तावेजों का पंजीयन कराने में आर्थिक सहूलियत मिल रही है। पहले जहां संपत्ति के मूल्य के आधार पर अधिक शुल्क देना पड़ता था, वहीं नई व्यवस्था से पंजीयन का खर्च काफी कम हो गया है।

जगदलपुर की श्रीमती नेत्र प्रभा जोशी को मिली 81,648 रुपये की आर्थिक राहत इस व्यवस्था का उदाहरण है। शुल्क में कमी से बची राशि का उपयोग परिवार अपनी अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में कर सकता है।

डिजिटल सुविधाओं से सरल और पारदर्शी हो रही पंजीयन प्रक्रिया

वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल दस्तावेज, ऑनलाइन भुगतान और ऑटोम्यूटेशन जैसी सुविधाओं से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है।

इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों के समय और धन की बचत करना तथा पंजीयन कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है। डिजिटल व्यवस्थाओं से नागरिकों को पंजीयन संबंधी कार्यों के लिए अधिक सुगम प्रक्रिया उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रदेश में विकसित हो रहे आधुनिक स्मार्ट पंजीयन कार्यालय

नागरिकों को बेहतर वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों का विकास किया जा रहा है। इन कार्यालयों में वातानुकूलित प्रतीक्षालय, डिजिटल टोकन प्रणाली, हेल्प डेस्क, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, निःशुल्क वाई-फाई और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

प्रथम चरण में सीबीडी नवा रायपुर, बेबीलोन टावर, श्रीराम बिजनेस पार्क सड्डू, अभनपुर, तिल्दा, रायगढ़, बिलासपुर, दुर्ग और कुनकुरी स्थित पंजीयन कार्यालयों को आधुनिक स्वरूप में विकसित किया जा चुका है। इन कार्यालयों में नागरिकों को सुविधाजनक वातावरण में पंजीयन कार्य पूरा करने और आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करने की व्यवस्था की गई है।

सेवा संकल्प अभियान से सामने आ रही बदलाव की कहानियां

पंजीयन विभाग का सेवा संकल्प अभियान नागरिकों के अनुभवों और सुझावों को जानने का माध्यम बन रहा है। इसके तहत हितग्राहियों से सीधे संवाद कर पंजीयन सेवाओं में हुए सुधारों के वास्तविक लाभ की जानकारी प्राप्त की जा रही है।

जगदलपुर की श्रीमती नेत्र प्रभा जोशी की कहानी दर्शाती है कि पारिवारिक हकत्यागनामा के पंजीयन शुल्क में कमी से परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक राहत मिल सकती है। 81,648 रुपये की बचत और मात्र 500 रुपये के पंजीयन शुल्क ने उनके परिवार के लिए संपत्ति संबंधी दस्तावेज का पंजीयन अधिक किफायती बनाया है।

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