रायपुर, 17 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ में हाथकरघा और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित स्वदेशी फैशन शो में समाज की मुख्यधारा में लौट रही आत्मसमर्पित और पुनर्वासित महिलाओं की सशक्त भागीदारी देखने को मिली। सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्रों में रह रही 9 महिलाओं ने अपनी स्वेच्छा से रैंप वॉक किया।

इन महिलाओं ने बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम के कोसा और कॉटन से तैयार आकर्षक परिधान पहनकर फैशन शो में हिस्सा लिया। इस पहल से महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने का संदेश सामने आया।

7 अगस्त को हुआ था स्वदेशी फैशन शो

राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस (7 अगस्त) के अवसर पर रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में स्वदेशी फैशन शो और ग्रामोद्योग हाथकरघा प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन और ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेंद्र यादव के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य के हाथकरघा उत्पादों का प्रचार-प्रसार करना और बुनकरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना था।

विभाग ने कहा- महिलाओं की भागीदारी पूरी तरह स्वैच्छिक

ग्रामोद्योग विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुकमा जिला प्रशासन ने 19 जुलाई 2026 को महिलाओं की सहभागिता की जानकारी दी थी। इसके बाद चयनित सभी 9 महिलाओं ने लिखित सहमति देकर आयोजन में शामिल होने की इच्छा जताई थी।

विभाग के अनुसार महिलाओं ने बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से फैशन शो में भाग लिया। विभाग ने इसे पुनर्वासित महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।

160 हितग्राहियों को मिलेगा निःशुल्क हाथकरघा प्रशिक्षण

महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को गति देने के लिए बस्तर संभाग के 8 पुनर्वास केंद्रों के 160 हितग्राहियों को हाथकरघा वस्त्र बुनाई का नया प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक केंद्र से 20 हितग्राहियों को प्रशिक्षण देने की योजना है।

इसके लिए 54.40 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। प्रशिक्षणार्थियों को निःशुल्क नए करघे और आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे घर से ही काम कर रोजगार और आय अर्जित कर सकें।

स्वरोजगार से जोड़ना स्थायी पुनर्वास के लिए जरूरी

ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक श्री राजेश सिंह राणा ने कहा कि पुनर्वासित हितग्राहियों को स्वरोजगार से जोड़ना उनके स्थायी पुनर्वास और सशक्तिकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि हाथकरघा प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों से पुनर्वासित हितग्राहियों को आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी। स्वदेशी फैशन शो में महिलाओं की भागीदारी भी इसी दिशा में आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

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