नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026
त्योहारी सीजन में चीनी की बढ़ी कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। चीनी का एक्स-मिल रेट 17 से 20 रुपये प्रति किलो तक घटकर 47 से 55 रुपये के बीच आ गया है। हालांकि, इस गिरावट का पूरा फायदा अभी खुदरा बाजार में ग्राहकों को नहीं मिल रहा है। दुकानों पर चीनी की कीमत अभी भी करीब 62 रुपये प्रति किलो तक बनी हुई है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में चीनी का औसत खुदरा भाव 65.08 रुपये से घटकर 62.57 रुपये प्रति किलो हो गया है। यानी खुदरा बाजार में ग्राहकों को फिलहाल करीब 2.50 रुपये प्रति किलो की राहत मिली है।
67 रुपये से घटकर 47-55 रुपये हुआ मिल रेट
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चीनी का एक्स-मिल रेट कुछ समय पहले करीब 67 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। अब इसमें बड़ी गिरावट आई है और कई मिलों में चीनी की कीमत 47 से 55 रुपये प्रति किलो के दायरे में आ गई है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के अनुसार, मिल और खुदरा कीमत के बीच सामान्य तौर पर बहुत ज्यादा अंतर नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को अभी अपेक्षित राहत नहीं मिल रही है।
पुराने महंगे स्टॉक की वजह से खुदरा दाम में धीमी गिरावट
खुदरा कीमतों में गिरावट धीमी होने की एक बड़ी वजह पुराना महंगा स्टॉक बताया जा रहा है। थोक कारोबारियों और किराना दुकानदारों ने अगस्त के मध्य में चीनी 65 से 67 रुपये प्रति किलो के ऊंचे भाव पर खरीदी थी।
छोटे दुकानदार आमतौर पर एक बार में 10 से 15 बोरी तक चीनी का स्टॉक रखते हैं। ऐसे में उनके पास अभी भी महंगे भाव पर खरीदा गया माल मौजूद है। नए कम भाव का माल आने के बावजूद दुकानदार पुराने स्टॉक को लागत से कम कीमत पर बेचने से बच रहे हैं।
सस्ती चीनी बाजार तक पहुंचने में लगेगा समय
चीनी मिलों के मुताबिक, एक्स-मिल कीमत में गिरावट का असर थोक मंडियों में अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई देता है। लेकिन सस्ता माल थोक बाजार से स्थानीय किराना दुकानों तक पहुंचने और पुराने स्टॉक के खत्म होने में कुछ समय लगता है।
जानकारों के अनुसार, एक्स-मिल कीमत में हुई कमी का पूरा असर खुदरा बाजार में दिखाई देने में 7 से 10 दिन लग सकते हैं। इसके बाद यदि नई कीमतों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो ग्राहकों को चीनी के दाम में और राहत मिलने की उम्मीद है।
यानी मिलों में चीनी 17-20 रुपये तक सस्ती हो चुकी है, लेकिन पुराने महंगे स्टॉक और सप्लाई चेन की वजह से इसका पूरा फायदा फिलहाल ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाया है।



