रायपुर, 23 सितंबर 2026
छत्तीसगढ़ की पहचान अब केवल अपने प्राकृतिक संसाधनों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी तेजी से बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उच्च शिक्षा प्रदेश के लाखों युवाओं को आत्मनिर्भर, दक्ष और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का आधार बन रही है। राज्य सरकार द्वारा ‘सेवा का संकल्प’ और ‘सेवा आपके द्वार’ के मूलमंत्र के साथ ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों तक उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा का विस्तार
क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने के लिए राज्य में वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में नवीन शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही पहले से संचालित संस्थानों में नए संकाय, नवीन विषय और अध्ययन सीटों का विस्तार किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अधिक अवसर मिल सकें।
उच्च शिक्षण संस्थानों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक स्वरूप देने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुराने भवनों के कायाकल्प के साथ नए परिसरों का निर्माण, उन्नत प्रयोगशालाएं, समृद्ध पुस्तकालय और ई-क्लासरूम जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी भी डिजिटल माध्यम से वैश्विक ज्ञान नेटवर्क से जुड़ रहे हैं।
उच्च शिक्षा में लागू हो रही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP 2020) का चरणबद्ध और सुनियोजित क्रियान्वयन किया जा रहा है। जुलाई 2024 से शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों के स्नातक पाठ्यक्रमों में NEP लागू की गई। इसके बाद वर्ष 2025 से पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर और इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ जैसे संस्थानों में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई।
सत्र 2025-26 से चार वर्षीय बीएड, प्राच्य संस्कृत और बीपीएड जैसे व्यावसायिक एवं विशिष्ट पाठ्यक्रमों को भी इसके दायरे में लाया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बहुविषयक और व्यावहारिक शिक्षा उपलब्ध कराना है।
शिक्षा के साथ मानसिक स्वास्थ्य और करियर मार्गदर्शन पर जोर
शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और जीवन कौशल का विकास भी है। विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, परीक्षा तनाव और भविष्य से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालयों में ‘करियर एवं मार्गदर्शन प्रकोष्ठ’ स्थापित किए जा रहे हैं।
इन प्रकोष्ठों के माध्यम से विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों द्वारा काउंसलिंग की व्यवस्था की जा रही है। शिक्षक-छात्र अनुपात को बेहतर बनाए रखने के लिए नए पदों के सृजन पर भी काम किया जा रहा है। वहीं राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के माध्यम से महाविद्यालयों को NAAC मूल्यांकन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
खेल, NSS, NCC और योग से विद्यार्थियों का समग्र विकास
अकादमिक गतिविधियों के साथ विद्यार्थियों के समग्र विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। अकादमिक कैलेंडर में खेलकूद, NSS, NCC और योग जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया है। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार से जुड़ रही शिक्षा
राज्य शासन की नीतियों में बुनियादी ढांचे, डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसरों को एक-दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के साथ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और शैक्षणिक सुविधाओं का विस्तार युवाओं को बदलती रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे ये प्रयास वर्तमान पीढ़ी को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ भविष्य के लिए समर्थ, सजग और हुनरमंद नागरिकों के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।



