रायपुर, 11 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित ‘निदान-03’ शिविर दिव्यांगजनों के जीवन में बदलाव की नई मिसाल पेश कर रहा है। धमतरी जिले के ग्राम गोजी निवासी तेजराम साहू की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है, जिन्हें वर्षों के संघर्ष के बाद महज डेढ़ से दो घंटे में कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराया गया।
18 साल की उम्र में ट्रेन हादसे ने बदल दी जिंदगी
तेजराम साहू की जिंदगी में उस समय बड़ा संकट आया, जब महज 18 वर्ष की उम्र में एक भीषण ट्रेन दुर्घटना में उनका दायां हाथ गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें अपना हाथ गंवाना पड़ा।
इतनी कम उम्र में हुए इस हादसे के बाद तेजराम के लिए रोजमर्रा के काम करना और आजीविका चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। हाथ के अभाव में उन्हें कई छोटे-बड़े कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार संघर्ष करते हुए जीवन को आगे बढ़ाया।
निदान-03 शिविर ने दी नई उम्मीद
जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘निदान-03’ शिविर ने तेजराम के जीवन में नई उम्मीद जगाई।
सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस शिविर का उद्देश्य जरूरतमंद दिव्यांगजनों तक जनकल्याणकारी सेवाएं और सहायक उपकरण बिना देरी के पहुंचाना है। शिविर में पहुंचे तेजराम का भगवान महावीर सेवा संस्थान के इंजीनियरों ने तत्काल माप लिया और कृत्रिम हाथ तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
डेढ़ से दो घंटे में तैयार हुआ कृत्रिम हाथ
शिविर में तेजराम को महज डेढ़ से दो घंटे की रिकॉर्ड समयसीमा में कृत्रिम हाथ तैयार कर उपलब्ध कराया गया। वर्षों से हाथ के अभाव में जीवन जी रहे तेजराम के लिए यह पल बेहद भावुक कर देने वाला था।
कृत्रिम हाथ मिलते ही उनकी आंखों में खुशी के आंसू और चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान दिखाई दी। उन्होंने जिला प्रशासन और समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उनका जीवन पहले से आसान होगा और वे अपने दैनिक कार्य खुद करने में अधिक सक्षम होंगे।
कृत्रिम हाथ नहीं, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का सहारा
तेजराम साहू की कहानी केवल एक सहायक उपकरण मिलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह सेवा संकल्प अभियान के मानवीय और संवेदनशील पक्ष को दर्शाती है। इस पहल ने उन्हें सुविधा के साथ-साथ आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है।
तेजराम के चेहरे पर खिली मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और त्वरित सेवा का समन्वय किसी जरूरतमंद के जीवन में नई ऊर्जा और उम्मीद भर सकता है।



