गरियाबंद, 12 जून 2026
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व और गरियाबंद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सागौन तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। तस्करों ने वन विभाग की कार्रवाई से बचने के लिए सागौन लकड़ी को जमीन के अंदर गड्ढों में और पानी से भरे तालाबों में छिपा रखा था, जिसे छापेमारी के दौरान बरामद कर लिया गया।
जानकारी के अनुसार, 5 जून को ओडिशा सीमा से लगे साहेबिनकछार गांव में वन विभाग ने सूचना के आधार पर दबिश दी थी। शुरुआती कार्रवाई में राष्ट्रीयकृत सागौन से बने कई फर्नीचर जब्त किए गए थे। इसके बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए विभाग ने संदिग्धों के घरों में सर्च वारंट के तहत छापेमारी की।

उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि कार्रवाई की भनक लगते ही आरोपियों ने सागौन स्लीपर, बीजा स्लीपर और हाथ आरे को घरों की बाड़ियों और तालाबों में छिपा दिया था। हालांकि वन विभाग की टीम ने सभी सामान बरामद कर जब्त कर लिया।
कार्रवाई के दौरान 193 नग सागौन स्लीपर, 4.56 घन मीटर अवैध लकड़ी, एक पेट्रोल चालित आरा मशीन और तीन बड़े हाथ आरे जब्त किए गए। जब्त लकड़ी की अनुमानित कीमत करीब 6 लाख रुपये बताई जा रही है।
वन विभाग के अनुसार, छिपाई गई लकड़ी को खोजने में स्निफर डॉग “टीना” की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा तीन आरोपियों के पास से वन्यजीव शिकार में इस्तेमाल होने वाले जाल, पोटाश बम और अन्य उपकरण भी बरामद किए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले भी उदंती नदी के रास्ते सागौन के लठ्ठों की तस्करी के मामले सामने आ चुके हैं। वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।


