नई दिल्ली,25 अगस्त 2026
देश में चीनी की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने की दिशा में नई व्यवस्था लागू की है।
सरकार के नए नियमों के तहत टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के माध्यम से आयात की जाने वाली कच्ची चीनी के रिफाइनिंग और बिक्री की समय-सीमा अब एक निश्चित अंतिम तारीख के बजाय हर आयात खेप के अनुसार अलग-अलग तय की जाएगी।
2 महीने के भीतर रिफाइनिंग और बिक्री अनिवार्य
सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ शुगर के TRQ आयात से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। नई व्यवस्था के अनुसार, आयातित कच्ची चीनी को दो महीने के भीतर रिफाइन कर बाजार में बेचना अनिवार्य होगा।
पहले इसके लिए 31 अक्टूबर 2026 की एक तय अंतिम समय-सीमा निर्धारित थी। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से आयातित चीनी को लंबे समय तक रोककर रखने की संभावना कम होगी और जमाखोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
एक महीने में करीब 29 फीसदी बढ़ी चीनी की कीमत
देश में पिछले एक महीने के दौरान चीनी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य करीब 48.73 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 63.05 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
इस तरह एक महीने के भीतर चीनी की कीमत में करीब 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुछ स्थानों पर अधिकतम खुदरा मूल्य 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात भी सामने आई है।
मौसम, उत्पादन और जमाखोरी से बढ़ा दबाव
चीनी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही सट्टेबाजी और जमाखोरी ने भी बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ाया है।
आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए बढ़ती मांग ने भी कीमतों को प्रभावित किया है। हालांकि, उद्योग जगत का कहना है कि मांग को पूरा करने के लिए देश में आवश्यक स्टॉक उपलब्ध है।
देश में मौजूद है अतिरिक्त चीनी स्टॉक
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी चीनी उत्पादन में कमी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि गन्ने की फसल पर अल नीनो जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियों का असर पड़ा है, जिसका प्रभाव चीनी उत्पादन पर भी देखने को मिला।
भारत में सालाना चीनी की जरूरत करीब 280 लाख टन बताई जाती है, जबकि देश में 20 से 25 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक मौजूद होने की जानकारी दी गई है।
सरकार के इस नए फैसले का उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना, जमाखोरी रोकना और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण करना है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयात नियमों में किए गए बदलाव का आम उपभोक्ताओं को मिलने वाली चीनी की कीमतों पर कितना असर पड़ता है।



