नई दिल्ली,25 जुलाई 2026
ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष के 13वें दिन हालात और अधिक गंभीर हो गए। ईरान ने इराक के इरबिल स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर कई हमले किए, जबकि जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध के दौरान जहाजों और मालवाहक पोतों को हुए नुकसान की भरपाई ईरान की विदेशों में जब्त संपत्ति से की जाएगी। उन्होंने संकेत दिए कि अमेरिका ईरान के खिलाफ और व्यापक सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, इरबिल में कई धमाके हुए और अमेरिकी बलों ने विस्फोटक लदे पांच ड्रोन मार गिराए। सुरक्षा कारणों से इरबिल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कुछ समय के लिए उड़ानें रोक दी गईं, जिन्हें बाद में बहाल कर दिया गया।
इस बीच ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहे एक जहाज पर अमेरिकी बलों ने हमला किया। जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाए जाने के बाद उससे डिस्ट्रेस कॉल भेजी गई। वहीं, हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य खुला है, लेकिन जहाज कंपनियां अब भी अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में जहाजों की आवाजाही पर भी असर पड़ा है।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने पड़ोसी देशों के लोगों से अमेरिकी सैन्य अड्डों से दूर रहने की अपील की है। वहीं बहरीन और कुवैत में भी अमेरिकी ठिकानों पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान के नौसैनिक अड्डों और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं।
तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र ने समुद्री मार्गों में फंसे हजारों नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।



