रायपुर/धमतरी,20 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाला और धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई तेज कर दी है। जांच एजेंसी की टीम ने कांग्रेस नेता और पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के घर दबिश दी है। जानकारी के मुताबिक, ED की टीम दो गाड़ियों में पहुंची, जिसमें करीब 8 अधिकारी शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि अधिकारी घर पर मौजूद दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। कार्रवाई के दौरान घर के बाहर सुरक्षा के लिए जवानों को भी तैनात किया गया है।
72 करोड़ रुपये की कथित अपराध की आय से संबंध का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, रामगोपाल अग्रवाल का कथित तौर पर 72 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय से संबंध रहा है। ED ने अदालत के समक्ष यह भी कहा था कि अग्रवाल को कई बार समन जारी किए गए थे और पूछताछ के दौरान जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने का आरोप लगाया गया।
ED का दावा है कि कथित शराब घोटाले से प्राप्त अवैध नकदी का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष के रूप में रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाया जाता था। एजेंसी के अनुसार, कथित तौर पर यह नकदी रायपुर स्थित राजीव भवन तक पहुंचाई जाती थी।
कथित नकदी लेन-देन के नेटवर्क की जांच
प्रवर्तन निदेशालय अब कथित अवैध नकदी के लेन-देन और वितरण के पूरे नेटवर्क की जांच कर रहा है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित घोटाले से मिली रकम किन माध्यमों से और किन लोगों तक पहुंचाई गई तथा इसमें शामिल अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
ED का आरोप है कि अग्रवाल ने कथित तौर पर घोटाले से प्राप्त रकम को एडजस्ट करने और उसके लेन-देन से जुड़े मामलों में भी भूमिका निभाई। इन आरोपों की जांच जारी है।
2019 से 2022 के बीच हुए कथित घोटाले की जांच
ED के अनुसार, छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला 2019 से 2022 के बीच का है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान एक कथित सिंडिकेट ने आबकारी विभाग की व्यवस्था को प्रभावित किया, जिससे राज्य को 2,883 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का दावा किया गया।
एजेंसी इस मामले में अब तक कई आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और बड़ी संख्या में लोगों को आरोपी बनाया गया है। मामले में ईडी और अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई तथा जांच आगे भी जारी है।



