बिलासपुर, 8 जून 2026

मातृभाषा छत्तीसगढ़ी में शिक्षा को अनिवार्य बनाने की मांग को लेकर न्यायधानी बिलासपुर में साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी के संरक्षक और संघ के पूर्व प्रचारक नंदकिशोर शुक्ल ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी छत्तीसगढ़ी भाषा को शिक्षा व्यवस्था में उसका उचित स्थान नहीं मिल पाया है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में मातृभाषा में शिक्षा को प्राथमिकता देने का प्रावधान है, लेकिन इसका प्रभावी पालन नहीं हो रहा है। इस स्थिति को बदलने के लिए समाज के प्रबुद्ध वर्ग और साहित्यकारों को आगे आकर ठोस पहल करनी होगी।

बैठक में राज्य सरकार द्वारा अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के विस्तार के निर्णय पर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषा को प्राथमिकता दिए बिना शिक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने सरकार से मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की मांग की।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि छत्तीसगढ़ी भाषा में शिक्षा को अनिवार्य बनाने के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा और आवश्यक होने पर कानूनी स्तर पर भी प्रयास किए जाएंगे।

इस दौरान रामकिशोर को छत्तीसगढ़ी भाषा प्रचार समिति का जिला संयोजक नियुक्त किया गया। बैठक में अरुण कुमार, मनीष गौरहा, त्रिगुनीनारायण, रामनिहाल, पियूष निषाद, पं. विजय, पुनीराम सोनी, कुंदन सिंह, रामरतन, सुरेश यादव, महेंद्र शर्मा, प्रदीप कुमार, हरबंश कुमार, अमृत लाल, गणपति, दिलीप कुमार, महावीर सिंह, प्रेमचंद्र और देवराज सहित कई प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

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