रायपुर, 1 नवंबर 2026
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर नवा रायपुर के राज्योत्सव मैदान में आयोजित तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में प्रदेश की पारंपरिक कला, संस्कृति और हस्तशिल्प की अनूठी झलक देखने को मिल रही है। राज्योत्सव में विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं एवं उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी और स्टॉल लगाए गए हैं। वहीं, शिल्पग्राम जोन में प्रदेश के पारंपरिक हस्तशिल्प और हस्तनिर्मित उत्पाद लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
शिल्पग्राम में झारा आर्ट की कलाकृतियां विशेष रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। लॉस्ट वैक्स तकनीक से तैयार पारंपरिक शिल्प की मूर्तियां, सजावटी वस्तुएं और लोक आकृतियां दर्शकों को खूब पसंद आ रही हैं। बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर इन कलाकृतियों को देख रहे हैं और उनकी खरीदारी भी कर रहे हैं।
सारंगढ़ के युवा शिल्पकार प्रदीप की छिंद पेड़ कलाकृति बनी आकर्षण
शिल्पग्राम में सारंगढ़ जिले के ग्राम कांदुरपाली से आए युवा शिल्पकार श्री प्रदीप झरेका अपनी सारबिला झारा आर्ट की कलाकृतियों का प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी बनाई छिंद पेड़ की कलाकृति दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
इस कलाकृति के माध्यम से उन्होंने जनजातीय जीवन और संस्कृति में छिंद पेड़ के महत्व को खूबसूरती से उकेरा है। इसमें छिंद पेड़ से रस एकत्रित करने की पारंपरिक प्रक्रिया को भी बेहद बारीकी से दर्शाया गया है। कलाकृति के जरिए जनजातीय समुदायों की जीवनशैली और पारंपरिक ज्ञान को समझने का अवसर मिल रहा है।
झारा आर्ट की कलाकृतियों को मिल रही सराहना
शिल्पकार प्रदीप झरेका ने बताया कि राज्योत्सव जैसे आयोजनों से स्थानीय शिल्पकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने और अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। झारा आर्ट के प्रति लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि आगंतुक न केवल कलाकृतियों की खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि उनके निर्माण की प्रक्रिया और सांस्कृतिक महत्व के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं। विशेष रूप से देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और पारंपरिक लोक आकृतियों को लोग पसंद कर रहे हैं।
पारंपरिक कला और शिल्पकारों को मिल रहा मंच
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश की पारंपरिक कला एवं शिल्प को प्रोत्साहित करने और स्थानीय शिल्पकारों को बेहतर मंच उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास कर रही है। इसी क्रम में शिल्पग्राम एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभर रहा है।
यहां प्रदेश के विभिन्न अंचलों की लोककला, परंपरा और शिल्प कौशल को एक साथ देखने का अवसर मिल रहा है। इससे स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ हस्तनिर्मित उत्पादों को नए बाजार और ग्राहक उपलब्ध कराने में भी मदद मिल रही है।
बस्तर की महिला शिल्पकारों की कलाकृतियां भी बनी आकर्षण
शिल्पग्राम में बस्तर अंचल की युवा महिला शिल्पकार भी अपनी विशिष्ट कलाकृतियों के साथ मौजूद हैं। उनकी कृतियों में बस्तर की परंपरा, प्रकृति और जनजातीय जीवन की सुंदर झलक देखने को मिल रही है।
प्राकृतिक प्रतीकों और वन्य जीवों की आकृतियों के माध्यम से इन महिला शिल्पकारों ने जनजातीय संस्कृति के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी प्रस्तुत किया है।
राज्योत्सव का शिल्पग्राम इस तरह प्रदेश की समृद्ध लोककला, पारंपरिक हुनर और जनजातीय विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है। यहां आने वाले लोगों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को करीब से जानने और स्थानीय शिल्पकारों की कला को प्रोत्साहित करने का अवसर मिल रहा है।



