रायपुर, 4 नवंबर 2026
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रदर्शनी को उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक नवाचारों पर आधारित इस प्रदर्शनी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शनी में ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित विभिन्न योजनाओं और उनके माध्यम से गांवों में आ रहे बदलावों को आकर्षक मॉडल, तस्वीरों और उत्पादों के जरिए प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शनी में बिहान की दीदियों द्वारा तैयार ‘छत्तीसकला’ ब्रांड के उत्पाद, धमतरी जिले की पीएम जनमन आवास कॉलोनी का मॉडल, अपशिष्ट प्लास्टिक से सड़क निर्माण, जल संरक्षण, बकरी पालन और सौर ऊर्जा से जुड़ी पहल विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
छत्तीसकला से बिहान की दीदियों के हुनर को मिली नई पहचान
प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की अभिनव पहल ‘छत्तीसकला’ ने विशेष आकर्षण बटोरा। इसके अंतर्गत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार स्थानीय एवं पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग के साथ प्रदर्शित किया गया।
स्टॉल में जेराफूल चावल, मिलेट आधारित खाद्य पदार्थ, तिखुर पाउडर, सत्तू लड्डू, हस्तशिल्प और सजावटी सामग्रियों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया गया। खास बात यह रही कि बिहान की दीदियों ने स्वयं स्टॉल का संचालन किया और आगंतुकों को अपने उत्पादों की विशेषताओं तथा उद्यमिता से जुड़ी जानकारी दी।
छत्तीसकला के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के कौशल, मेहनत और उद्यमशीलता को बाजार से जोड़ने की पहल ने महिला आत्मनिर्भरता की प्रभावशाली तस्वीर प्रस्तुत की।
पीएम जनमन आवास कॉलोनी का मॉडल बना आकर्षण
प्रदर्शनी में धमतरी जिले के मसान डबरा में विकसित पीएम जनमन आवास कॉलोनी का मॉडल भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। इसमें सुव्यवस्थित आवासों, स्वच्छ एवं हरित परिसर, बुनियादी सुविधाओं और सामुदायिक विकास की अवधारणा को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
मॉडल के माध्यम से बताया गया कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को पक्के आवास और बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
7,900 किलो प्लास्टिक कचरे से 12 किलोमीटर सड़क का निर्माण
पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में अपशिष्ट प्लास्टिक से सड़क निर्माण का नवाचार प्रदर्शनी की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा।
विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश के चार जिलों में कुल 7,900 किलोग्राम (7.9 टन) अपशिष्ट प्लास्टिक का उपयोग कर लगभग 12 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है।
जिलेवार विवरण इस प्रकार है:
- बस्तर: 400 किलोग्राम प्लास्टिक से 1.5 किलोमीटर सड़क।
- महासमुंद: 3,700 किलोग्राम प्लास्टिक से 5 किलोमीटर सड़क।
- सरगुजा: 550 किलोग्राम प्लास्टिक से 1.5 किलोमीटर सड़क।
- मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर: 3,250 किलोग्राम प्लास्टिक से 4 किलोमीटर सड़क।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत किए गए इस प्रयोग से प्लास्टिक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने के साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण सड़क विकास को बढ़ावा देने का उदाहरण प्रस्तुत किया गया।
‘दीदी के गोठ’ की सफलता की नायिकाओं से हुआ सीधा संवाद
प्रदर्शनी में बिहान के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘दीदी के गोठ’ के अब तक प्रसारित सभी 15 एपिसोड भी प्रदर्शित किए गए। इसकी खास बात यह रही कि कार्यक्रम के माध्यम से जिन ग्रामीण महिलाओं की सफलता की कहानियां लोगों तक पहुंच रही हैं, वे दीदियां स्वयं भी प्रदर्शनी में पहुंचीं।
उन्होंने आगंतुकों से संवाद करते हुए अपने संघर्ष, स्वरोजगार, आजीविका गतिविधियों और आर्थिक आत्मनिर्भरता की यात्रा साझा की। इस तरह ‘दीदियों की कहानी, उन्हीं की जुबानी’ की अवधारणा को राज्योत्सव में जीवंत रूप मिला।
वीबी-जी राम जी से गांवों के समग्र विकास की झलक
प्रदर्शनी में विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण), अर्थात वीबी-जी राम जी के तहत ग्रामीण विकास से जुड़ी गतिविधियों को आकर्षक मॉडलों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
इसमें जल सुरक्षा एवं संरक्षण, मूल ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संवर्धन और आपदा प्रबंधन सहित कुल 375 अनुमेय कार्यों की जानकारी दी गई।
प्रमुख मॉडलों में डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज पिट, ‘मेरी बेटी मेरा अभिमान’ के तहत बालिका शौचालय, आजीविका संवर्धन के लिए बकरी पालन तथा वन सुरक्षा एवं संरक्षण से जुड़े मॉडल शामिल रहे।
इनके माध्यम से भूजल पुनर्भरण, ग्रामीण बालिकाओं की स्वच्छता एवं गरिमा, आजीविका के नए अवसर और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
‘सोलर दीदी’ पहल से स्वच्छ ऊर्जा और महिला आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
प्रदर्शनी में द्वीप्ती योजना और प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जुड़ी ‘सोलर दीदी’ पहल भी आकर्षण का केंद्र रही। इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सौर ऊर्जा आधारित उद्यमिता से जोड़ने के प्रयासों को प्रदर्शित किया गया।
तस्वीरों और जानकारियों के जरिए बताया गया कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बिहान की दीदियों की भागीदारी बढ़ाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
ग्रामीण विकास के नवाचारों को मिला सम्मान
राज्योत्सव में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रदर्शनी ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ के गांव अब केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के नए केंद्र बन रहे हैं।
एक ओर पीएम जनमन आवास कॉलोनी के माध्यम से जनजातीय परिवारों के बेहतर जीवन की तस्वीर सामने आई, तो दूसरी ओर छत्तीसकला ने ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं प्रदर्शित कीं। वहीं अपशिष्ट प्लास्टिक से सड़क निर्माण, जल संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा जैसे नवाचारों ने पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार विकास की दिशा को रेखांकित किया।
इन्हीं उपलब्धियों और प्रभावशाली प्रस्तुतियों के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रदर्शनी को राज्योत्सव 2026 में द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।



