रायपुर, 2 सितंबर 2026

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स रायपुर) के तीसरे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन शामिल हुए। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उत्सव का क्षण नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की शुरुआत का अवसर भी है। आज युवाओं को डिग्रियां मिल रही हैं, लेकिन आगे उन्हें भारत की जनता के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की जिम्मेदारी निभानी होगी।

समारोह में 376 महिलाओं और 313 पुरुषों को डिग्री प्रदान की गई। उपराष्ट्रपति ने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए।

एम्स रायपुर छत्तीसगढ़ के बदलाव का प्रतीक

उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2012 में स्थापना के बाद से एम्स रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि कम समय में यह संस्थान छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों के लिए प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है। एम्स रायपुर ग्रामीण और आदिवासी समुदायों तक भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचा रहा है।

उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर का विकास छत्तीसगढ़ में हो रहे उल्लेखनीय परिवर्तन को दर्शाता है।

नक्सलवाद के खिलाफ मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति से बदली तस्वीर

छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में दशकों तक चली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, खराब आवागमन और वामपंथी उग्रवाद विकास में गंभीर बाधा रहे।

दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में भय और हिंसा के कारण सड़क, स्कूल और अस्पतालों का विकास प्रभावित हुआ। लोगों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आज अतीत के अंधकार से निकलकर समृद्धि, विकास और प्रगति के नए युग की ओर अग्रसर है।

उपराष्ट्रपति ने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रतिबद्ध नेतृत्व को दिया।

उन्होंने कहा कि दशकों से चले आ रहे नक्सली खतरे का अंत हुआ है और जिन क्षेत्रों को कभी हिंसा के लिए जाना जाता था, वे अब सड़क, स्कूल, अस्पताल, कनेक्टिविटी, निवेश और अवसरों के लिए पहचाने जा रहे हैं।

उन्नत चिकित्सा सेवाओं में एम्स रायपुर की उपलब्धियां

उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को नए छत्तीसगढ़ के बेहतरीन प्रतीकों में से एक बताया। उन्होंने संस्थान की उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं और प्रत्यारोपण क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों की सराहना की।

उन्होंने छत्तीसगढ़ में किए गए पहले किडनी प्रत्यारोपण, किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर, कॉर्नियल प्रत्यारोपण और कान प्रत्यारोपण जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां बताती हैं कि क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा सेवाएं तेजी से सुलभ हो रही हैं। वहीं हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत के राष्ट्रीय विजन को हासिल करने के लिए संतुलित विकास को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य तभी पूरा होगा जब हर राज्य, जिला और गांव का विकास हो।

उन्होंने उच्च शिक्षा को विकसित भारत की परिकल्पना का मूल आधार बताया। वर्ष 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिला नामांकन 1.57 करोड़ था, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया। यह 42.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

युवाओं से नशे को ना कहने की अपील

स्नातकों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने युवाओं से नशीली दवाओं को दृढ़ता से ना कहने और बेहतर भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि युवाओं का ज्ञान स्वास्थ्य प्रदान करे, शोध नवाचार लाए और सेवा प्रेरणा बने।

उन्होंने एम्स रायपुर को नैदानिक उत्कृष्टता, वैज्ञानिक नवाचार, जन स्वास्थ्य और करुणापूर्ण सेवा के क्षेत्र में निरंतर सफलता की शुभकामनाएं दीं।

उपराष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि 2047 तक विकसित भारत की दिशा में छत्तीसगढ़ का परिवर्तन एक महत्वपूर्ण अध्याय बनेगा।

राज्यपाल रमेन डेका बोले- ज्ञान के साथ करुणा और नैतिकता जरूरी

राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल ज्ञान और कौशल तक सीमित नहीं है। इसमें धैर्य, करुणा और गहरी जिम्मेदारी की भावना भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य मानवता की सेवा है। एक चिकित्सक की श्रेष्ठता केवल उसकी पेशेवर दक्षता से नहीं, बल्कि मरीजों के साथ उसके व्यवहार, विश्वास और सम्मान से भी तय होती है।

राज्यपाल ने सभी उत्तीर्ण विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल, सफल और संतोषप्रद भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

एम्स रायपुर की बढ़ती प्रतिष्ठा छत्तीसगढ़ के लिए गौरव

राज्यपाल ने नव-स्नातक चिकित्सकों से स्वास्थ्य सेवाओं के विकास, नवाचार और चिकित्सा अनुसंधान में योगदान देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों, विशिष्ट चिकित्सकीय सेवाओं और अनुसंधान पहलों के माध्यम से क्षेत्र के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने विद्यार्थियों से चिकित्सा विशेषज्ञता के साथ वैज्ञानिक जिज्ञासा और अनुसंधान आधारित सोच अपनाने तथा समाज की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप नए समाधान विकसित करने का आग्रह किया।

अनुप्रिया पटेल ने भी दी विद्यार्थियों को बधाई

केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने आयुष्मान भारत, PM-JAY, ABHA और e-Sanjeevani जैसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों का उल्लेख किया।

उन्होंने युवा डॉक्टरों से चिकित्सा उत्कृष्टता, करुणा, नैतिकता, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, शोध और समाज सेवा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

689 डिग्री प्रमाण-पत्र और 16 पुरस्कार वितरित

दीक्षांत समारोह में विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले विद्यार्थियों को 689 डिग्री प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 16 पुरस्कार भी प्रदान किए गए। यह अवसर विद्यार्थियों, उनके परिवारों, शिक्षकों और पूरे एम्स रायपुर परिवार के लिए गौरव और खुशी का क्षण रहा।

एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने संस्थान की प्रगति और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए चिकित्सा शिक्षा, शोध, नवाचार और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं में उच्च मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

समारोह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल, एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

समारोह के दौरान विद्यार्थियों को ‘नशे को ना कहें’ की शपथ भी दिलाई गई।

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