रायपुर,28 अक्टूबर 2026
राजधानी रायपुर में निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे के अवैध निपटान पर रोक लगाने के लिए नगर निगम ने सख्त कदम उठाने की तैयारी की है। निगम ने मलबा प्रबंधन के लिए नए उपनियमों का मसौदा तैयार किया है। इसके तहत सड़क, खाली जगह, नाली और जलस्रोतों में मलबा फेंकने वालों पर 2 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। साथ ही, भवन तोड़ने से पहले नगर निगम से अनुमति लेना अनिवार्य करने की तैयारी है।
हालांकि, ये सभी प्रावधान फिलहाल मसौदे में प्रस्तावित हैं। इन्हें अंतिम रूप से लागू करने से पहले संबंधित स्तर पर चर्चा और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सड़क और खाली जगह पर मलबा फेंकने पर जुर्माना
नगर निगम के प्रस्तावित नियमों के अनुसार, वाहन से सड़क या खाली जगह पर मलबा फेंकने पर पहली बार 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है। तीसरी बार या उसके बाद नियम तोड़ने पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना और वाहन जब्त करने का प्रावधान प्रस्तावित है।
वहीं, नाली, नाले या जलस्रोत में मलबा डालने पर पहली बार 25 हजार रुपये और बार-बार उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है।
एक टन से कम मलबा हाथठेले या सिर पर ढोकर सड़क, प्लॉट अथवा नाली में फेंकने पर पहली बार 2 हजार रुपये और बार-बार ऐसा करने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
सड़क और फुटपाथ पर 24 घंटे से ज्यादा नहीं रख सकेंगे मलबा
मसौदे में बिना लिखित अनुमति सड़क, फुटपाथ, नाली, नाले, जलस्रोत या नगर निगम के पार्क में 24 घंटे से अधिक समय तक मलबा रखने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, निर्माण से निकलने वाले मलबे को घरेलू कचरे में मिलाने की अनुमति नहीं होगी।
इन नियमों का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर मलबे के ढेर लगने, नालियों में रुकावट आने और जलभराव जैसी समस्याओं को रोकना है।
मकान तोड़ने से पहले लेनी होगी नगर निगम की अनुमति
प्रस्तावित उपनियमों के तहत किसी भी भवन को तोड़ने से पहले नगर निगम से अनुमति लेना अनिवार्य किया जा सकता है। आवेदन में भवन मालिक को मलबे की अनुमानित मात्रा, तोड़फोड़ की अवधि, धूल रोकने के उपाय, सुरक्षा व्यवस्था और मलबे के निपटान के स्थान की जानकारी देनी होगी।
अनुमति मिलने के बाद निर्धारित सुरक्षा राशि और शुल्क जमा करना होगा। इसके बाद मलबे को अधिकृत केंद्र तक पहुंचाने का प्रमाण देना भी जरूरी होगा। इसके लिए चालान, तौल पर्ची या पोर्टल पर दर्ज जानकारी प्रस्तुत करनी पड़ सकती है। प्रस्ताव में यह भी प्रावधान है कि आवश्यक प्रमाण के बिना भवन का पूर्णता प्रमाणपत्र या अधिभोग प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा।
बड़े निर्माण प्रोजेक्टों के लिए मलबा प्रबंधन योजना जरूरी
मसौदे के अनुसार, 20 हजार वर्गमीटर या इससे अधिक निर्मित क्षेत्र वाले निर्माण और तोड़फोड़ प्रोजेक्टों के लिए मलबा प्रबंधन योजना प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
इस योजना में मलबे की अनुमानित मात्रा, विभिन्न सामग्रियों का वर्गीकरण, भंडारण, परिवहन और पुनर्चक्रण की जानकारी देनी होगी। मलबा ढोने वाले अधिकृत वाहनों को ढककर रखना होगा। बड़े प्रोजेक्टों में वाहनों के लिए जीपीएस की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
नगर निगम अपने निर्माण कार्यों में पुनर्चक्रित मलबे से तैयार सामग्री के इस्तेमाल को भी प्रोत्साहित करेगा, ताकि निर्माण अपशिष्ट का दोबारा उपयोग बढ़ाया जा सके।
दस जोन में बनाए जाएंगे मलबा संग्रह केंद्र
नगर निगम ने मसौदे में अगले एक साल के भीतर अपने सभी 10 जोन में कम से कम एक मलबा संग्रह केंद्र अधिसूचित करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही पुराने अवैध मलबा डंपिंग स्थलों की पहचान कर उनके निपटान की योजना तैयार करने का प्रस्ताव है।
नागरिक मलबा फेंकने या संग्रह केंद्र से संबंधित शिकायतें नगर निगम की हेल्पलाइन 1100, वार्ड कार्यालय या संबंधित मोबाइल एप के माध्यम से दर्ज करा सकेंगे। शिकायतों का निपटारा 15 कार्यदिवस के भीतर करने का प्रस्ताव भी मसौदे में शामिल है।
हर महीने निकलता है हजारों टन निर्माण मलबा
मसौदे में दिए गए अनुमान के अनुसार, शहर में हर महीने करीब 20 हजार मकानों से 20 हजार टन मलबा निकलता है। इस हिसाब से एक साल में लगभग 2.40 लाख मकानों से 2.40 लाख टन मलबा निकलने का अनुमान है। इतने बड़े पैमाने पर निकलने वाले निर्माण अपशिष्ट का व्यवस्थित निपटान नगर निगम के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।
एमएआईसी में रखा जाएगा प्रस्ताव
रायपुर नगर निगम के कमिश्नर संबित मिश्रा के अनुसार, निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान जरूरी है। इसके लिए उपनियमों का मसौदा तैयार किया जा रहा है, जिसे एमएआईसी में प्रस्ताव के रूप में रखा जाएगा। चर्चा और अनुमोदन के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
प्रस्तावित नियम लागू होने पर मलबे के संग्रहण, परिवहन और निपटान की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हो सकती है। साथ ही, सार्वजनिक स्थानों पर अवैध रूप से मलबा फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान तैयार होगा।



