रायपुर, 19 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण पहल की गई है। मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत दर्री अंतर्गत डोंगरी टोला में लगभग 3 हजार स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया गया है। इन संरचनाओं के माध्यम से 24 लाख 30 हजार लीटर वर्षा जल संग्रहण की क्षमता विकसित की गई है। यह पहल क्षेत्र में भूजल स्तर बढ़ाने, मिट्टी के कटाव को कम करने और गर्मी के दिनों में पानी की समस्या से जूझने वाले लगभग 250 ग्रामीण परिवारों को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
पहाड़ियों से बहने वाला वर्षा जल अब जमीन में होगा संरक्षित
पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में पानी बहकर निकल जाता है। इससे वर्षा जल का समुचित उपयोग नहीं हो पाता और मिट्टी का कटाव होने के साथ भूजल स्तर में गिरावट जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए ग्राम पंचायत दर्री के डोंगरी टोला में वैज्ञानिक पद्धति से स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया गया है। पहाड़ी ढलानों पर सीढ़ीनुमा क्रम में बनाई गई ये संरचनाएं वर्षा जल के बहाव को धीमा करेंगी और पानी को एकत्रित करने में मदद करेंगी। इससे पानी धीरे-धीरे जमीन में समाहित होगा और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा।
24.30 लाख लीटर जल संग्रहण क्षमता से मजबूत होगी जल सुरक्षा
डोंगरी टोला में निर्मित लगभग 3 हजार कंटूर ट्रेंच की कुल जल संग्रहण क्षमता 24 लाख 30 हजार लीटर है। वर्षा के दौरान इन संरचनाओं में पानी जमा होने से आसपास की भूमि में नमी बनाए रखने और मिट्टी के कटाव को कम करने में सहायता मिलेगी।
इस पहल से क्षेत्र में भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद है। इसका लाभ आसपास के कुओं और अन्य पारंपरिक जलस्रोतों को भी मिल सकता है। खासकर गर्मी के मौसम में पानी की कमी का सामना करने वाले 250 परिवारों के लिए यह पहल दीर्घकालीन जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
जल संरक्षण के साथ ग्रामीणों को मिला रोजगार
इस परियोजना की खास बात यह है कि जल संरक्षण के साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। कंटूर ट्रेंच निर्माण कार्य के दौरान प्रतिदिन लगभग 150 से 160 श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक इस कार्य के माध्यम से कुल 3166 मानव दिवस रोजगार का सृजन हो चुका है।
स्थानीय स्तर पर काम मिलने से ग्रामीण परिवारों को आजीविका का सहारा मिला है। इस तरह यह पहल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी योगदान दे रही है।
भूजल पुनर्भरण से बढ़ेगी हरियाली, मिट्टी के कटाव में आएगी कमी
कंटूर ट्रेंच के निर्माण से वर्षा जल को संरक्षित करने के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। पानी के जमीन में समाहित होने से मिट्टी में नमी बनी रहेगी, जिससे पेड़-पौधों और स्थानीय वनस्पतियों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार होंगी।
इसके अलावा, तेज बारिश के दौरान पानी के बहाव को नियंत्रित करने से मिट्टी के कटाव में कमी आ सकती है। भूमि में नमी बढ़ने से कृषि और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता में भी सुधार होने की संभावना है।
जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका का उदाहरण बना डोंगरी टोला
ग्राम पंचायत दर्री के डोंगरी टोला में विकसित की गई जल संरक्षण संरचनाएं प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन और ग्रामीण विकास के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण हैं। एक ओर यहां वर्षा जल को सहेजने के लिए स्थायी संरचनाएं तैयार की गई हैं, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्य से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिला है।
24.30 लाख लीटर वर्षा जल संग्रहण क्षमता, लगभग 3 हजार कंटूर ट्रेंच और 3166 मानव दिवस रोजगार इस पहल की प्रमुख उपलब्धियां हैं। आने वाले समय में यह प्रयास भूजल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।



