रायपुर, 27 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों, वन संपदा और महिला स्व-सहायता समूहों के परिश्रम को नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक का लोकार्पण किया। इन गिफ्ट पैक में वन धन विकास केंद्रों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए स्थानीय और हर्बल उत्पाद शामिल हैं। इस पहल से स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिलने के साथ वन उपज संग्राहकों और महिला समूहों की आय बढ़ाने के अवसर भी मिलेंगे।
वन संपदा और मातृशक्ति के परिश्रम से बने उत्पाद बनें छत्तीसगढ़ की पहचान : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। राज्य सरकार का प्रयास है कि वनों से प्राप्त उपज का अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन प्रदेश में ही किया जाए, ताकि इसका सीधा आर्थिक लाभ वन उपज संग्राहकों और महिला स्व-सहायता समूहों को मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से माताएं-बहनें स्थानीय वनोपज का प्रसंस्करण कर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराकर उनके परिश्रम को नई पहचान देने के साथ आय के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक इसी दिशा में एक सार्थक पहल हैं।
स्थानीय उत्पाद खरीदने की मुख्यमंत्री ने की अपील
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब लोग छत्तीसगढ़ में बने उत्पाद खरीदते हैं और उन्हें उपहार के रूप में देते हैं, तो इसका सीधा लाभ वनांचल के परिवारों और महिला स्व-सहायता समूहों तक पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाना हमारी परंपराओं, स्थानीय उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहभागिता निभाने जैसा है। दिवाली जैसे त्योहार पर इन उत्पादों को उपहार के रूप में अपनाने से प्रदेश की प्राकृतिक संपदा और स्थानीय कारीगरों के कौशल को बढ़ावा मिलेगा।
प्रीमियम और सामान्य, दो श्रेणियों में तैयार किए गए गिफ्ट पैक
‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक को उपभोक्ताओं की जरूरतों के अनुसार दो श्रेणियों—प्रीमियम और सामान्य में तैयार किया गया है।
- प्रीमियम गिफ्ट पैक: इसमें नौ प्रकार के चयनित उत्पाद शामिल हैं।
- सामान्य गिफ्ट पैक: इसमें पांच प्रकार के उत्पाद रखे गए हैं।
आम नागरिक इन गिफ्ट पैक को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा संचालित ‘संजीवनी’ विक्रय केंद्रों से खरीद सकेंगे। इस पहल के जरिए दिवाली पर उपहार देने की परंपरा को स्थानीय उत्पादों, महिला उद्यमिता और जनजातीय आजीविका से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
जामुन जूस से लेकर वाइल्ड फॉरेस्ट हनी तक, पैक में शामिल हैं कई खास उत्पाद
दिवाली गिफ्ट पैक में छत्तीसगढ़ की वन संपदा और पारंपरिक स्वाद से जुड़े विविध उत्पादों को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- जामुन जूस और जामुन स्प्रेड
- आंवला कैंडी और इमली कैंडी
- कोदो और महुआ से बने कुकीज़
- च्यवनप्राश
- वाइल्ड फॉरेस्ट हनी
- बस्तर के मसाले और नमकीन काजू
- जशपुर की ग्रीन टी
- एलोवेरा जेल
इन उत्पादों में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा, पारंपरिक खाद्य संस्कृति और महिला समूहों के उद्यम कौशल का समावेश है। बेहतर पैकेजिंग और विपणन से ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड को नई पहचान मिलने के साथ इन उत्पादों की बाजार में पहुंच बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
इन वन धन विकास केंद्रों में तैयार हो रहे हैं उत्पाद
गिफ्ट पैक में शामिल उत्पाद प्रदेश के विभिन्न वन धन विकास केंद्रों और प्रसंस्करण इकाइयों में तैयार किए जा रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- कौरीनभाटा — राजनांदगांव
- बोड़ला — कवर्धा
- पंचक्की — जशपुर
- आसना — जगदलपुर
- दुगली — धमतरी
- डोंगानाला — कटघोरा
- केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई, जामगांव (एम) — दुर्ग
इन वन धन विकास केंद्रों का वार्षिक कारोबार लगभग 60 से 70 लाख रुपये है। यहां वनोपज के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर पैदा किए जा रहे हैं।
विशेष रूप से महिला स्व-सहायता समूह उत्पादन, प्रसंस्करण और पैकेजिंग जैसी गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
महिला समूहों और वन उपज संग्राहकों को मिलेगा सीधा लाभ
वन धन उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण और विपणन से वन उपज संग्राहकों तथा महिला स्व-सहायता समूहों को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है। दिवाली गिफ्ट पैक के माध्यम से इन उत्पादों की मांग और बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।
इस पहल से वनांचल की अर्थव्यवस्था को मजबूती, स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार और महिला समूहों को आय के नए अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, छत्तीसगढ़ की वन संपदा से तैयार उत्पादों को प्रदेश के बाहर भी पहचान दिलाने की दिशा में मदद मिलेगी।



