नई दिल्ली,7 अगस्त 2026
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के तहत कानूनी संरक्षण प्राप्त हो गया है।
यह संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों से मॉनसून सत्र के दौरान पारित हुआ था। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून प्रभावी हो गया है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और गरिमा को और अधिक मजबूत करना है।
संशोधित कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के गायन में बाधा डालता है या उसे रोकने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन वर्ष की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है।
अब तक राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में मुख्य रूप से राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान से जुड़े मामलों को शामिल किया गया था। नए संशोधन के बाद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को भी इसी कानूनी संरक्षण के दायरे में शामिल कर लिया गया है।
सरकार का कहना है कि इस निर्णय से राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूती मिलेगी। साथ ही नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा।
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशभक्ति और जनजागरण का प्रमुख प्रतीक बना और स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, संशोधन के बाद प्रशासन और जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों में कार्रवाई का स्पष्ट आधार मिलेगा। हालांकि किसी भी कार्रवाई के लिए यह साबित करना आवश्यक होगा कि व्यवधान या अपमान जानबूझकर किया गया था। कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय सम्मान और नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना भी है।



