काठमांडू, 28 अगस्त 2026
प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे नेपाल के सामने एक बार फिर बड़ा खतरा खड़ा हो गया है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक और झील फटने के बाद नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। इसके चलते कई इलाकों में हाई अलर्ट घोषित किया गया है और नदी किनारे बसे गांवों को खाली कराया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, यह झील चोचेन नदी और पुरेपु सांगपो नदी के संगम के पास बनी थी। चीन ने एक दिन पहले ही इस झील के फटने की आशंका जताई थी। झील के टूटने के बाद पानी का बहाव बढ़ गया है, जिससे नेपाल की ओर अचानक तेज पानी आने का खतरा पैदा हो गया है।
60 से 90 मिनट बेहद अहम
अधिकारियों ने भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को पूरी तरह सतर्क रहने की सलाह दी है। प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
खतरे को देखते हुए रसुवा जिले में रेस्क्यू ऑपरेशन करीब 90 मिनट के लिए रोक दिया गया है। लोगों और सुरक्षाकर्मियों को भी तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अगले 60 से 90 मिनट नेपाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
25 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा पानी
चीनी सरकारी मीडिया CCTV के मुताबिक, झील का पानी उसके किनारों से बाहर निकलना शुरू हो गया है। इसके साथ ही संबंधित नदी का जलस्तर भी बढ़ने लगा है।
चीनी सर्वे के अनुसार, झील में अब 25 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा पानी जमा हो चुका था। इससे पहले चीनी इंजीनियरिंग टीम ने झील में करीब 15 से 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी होने का अनुमान लगाया था।
चीन ने यह भी अनुमान लगाया था कि अगले तीन दिनों में झील में करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी पहुंच सकता है। पानी की यह मात्रा लगभग 1,200 ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल के बराबर बताई गई थी।
भूकंप के बाद बढ़ा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, चीन के सिचुआन प्रांत में शुक्रवार सुबह करीब 11:30 बजे 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। इसके बाद शुओकेन नदी और पोइक त्सांगपो नदी के संगम पर बनी एक बड़ी झील के टूटने की जानकारी सामने आई।
तिब्बत में पहले आई बाढ़ के बाद बनी इस बैरियर झील के टूटने से भोटेकोशी नदी के रास्ते नेपाल की ओर तेज पानी आने का खतरा बढ़ गया है। इसी वजह से नदी किनारे बसे इलाकों में अलर्ट और निकासी अभियान तेज किया गया है।
पहले ही 475 लोगों की हो चुकी है मौत
गौरतलब है कि 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के कारण आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने रसुवा समेत कई इलाकों को प्रभावित किया।
इस आपदा में अब तक 475 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1600 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में करीब 290 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
अब एक और झील के फटने से नेपाल में नए सिरे से बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम जारी है।



