रायपुर,21 अगस्त 2026
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में B.Sc. द्वितीय वर्ष के एंटोमोलॉजी विषय का प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की जानकारी मिलते ही उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को तत्काल जांच समिति गठित करने और दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए।
मंत्री के निर्देश के बाद मामले में FIR दर्ज कर पुलिस जांच शुरू कर दी गई है। कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि परीक्षाओं की निष्पक्षता और विद्यार्थियों के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
विश्वविद्यालय प्रबंधन की शिकायत पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ तेलीबांधा थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम की धारा 4, 5 और 10 के साथ ही BNS की धारा 316 के तहत अपराध दर्ज किया है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र किस स्तर से और किस माध्यम से लीक हुआ।
परीक्षा शुरू होने से पहले मिली लीक की सूचना
जानकारी के अनुसार, B.Sc. द्वितीय वर्ष के Pest Management in Crops and Stored Grains-I (AENT 221) विषय की परीक्षा गुरुवार को आयोजित होनी थी। परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिली।
सुबह करीब 8:50 बजे कवर्धा से पेपर लीक की सूचना मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुबह 10:30 बजे आयोजित होने वाली परीक्षा को तत्काल निरस्त करने का निर्णय लिया गया।
5 सदस्यीय जांच समिति गठित
पेपर लीक मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने 5 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपेगी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जल्द होगी नई परीक्षा
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। निरस्त की गई परीक्षा की नई तारीख जल्द तय की जाएगी और इसकी जानकारी परीक्षार्थियों को समय पर दी जाएगी।
मंत्री ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटना बेहद गंभीर है और जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय के प्रश्नपत्रों की सेटिंग और छपाई विश्वविद्यालय स्तर पर की जाती है, जिसके बाद प्रश्नपत्र संबंधित महाविद्यालयों को भेजे जाते हैं। ऐसे में अब जांच एजेंसियां और विश्वविद्यालय प्रशासन पेपर लीक के पूरे नेटवर्क और सभी संभावित पहलुओं की जांच में जुटे हैं।



