शिमला,11 अगस्त 2026
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मानसून से जुड़ी आपदाओं में अब तक 155 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं राज्य को करीब 8,352 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ है।
भारी बारिश और भूस्खलन के कारण राज्य में 259 सड़कें बंद हैं, जबकि 255 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए हैं। सड़क बंद होने के मामले में मंडी सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहां 88 सड़कें बंद हैं। इसके बाद कुल्लू में 39 और शिमला में 13 सड़कें आवाजाही के लिए बंद हैं।
अब तक 155 लोगों की मौत
मानसून से जुड़ी कुल आपदा रिपोर्ट में मृतकों की संख्या 155 बताई गई है। इनमें 68 मौतें आपदा से जुड़ी घटनाओं और 87 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुई हैं।
आपदा से जुड़ी 68 मौतें भूस्खलन, पेड़ और पत्थर गिरने, डूबने, अचानक बाढ़ और आग जैसी घटनाओं के कारण हुईं। मंडी में आपदा से जुड़ी सबसे अधिक 14 मौतें हुई हैं। इसके बाद कांगड़ा में 11, चंबा और शिमला में नौ-नौ और कुल्लू में आठ लोगों की जान गई है।
वहीं सड़क दुर्घटनाओं में चंबा में सबसे अधिक 15 मौतें, जबकि कुल्लू और शिमला में 12-12 तथा कांगड़ा में 10 लोगों की मौत हुई है।
8,352 करोड़ रुपये का नुकसान
सरकारी विभागों, खेती और निजी संपत्ति को हुए कुल अनुमानित नुकसान का आंकड़ा 83,526.19 लाख रुपये, यानी करीब 8,352.62 करोड़ रुपये बताया गया है।
इस नुकसान में सबसे बड़ा हिस्सा लोक निर्माण विभाग (PWD) का है, जिसे करीब 61,585.43 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं जल शक्ति विभाग को 19,986.05 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है।
घर और पशुधन भी प्रभावित
मानसून की मार से रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। राज्य में 213 घर पूरी तरह और 620 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा 256 कच्ची-पक्की झोपड़ियां और 22 दुकानें भी प्रभावित हुई हैं।
आपदा से जुड़ी घटनाओं में राज्यभर में 200 पशुओं की मौत हुई है, जबकि 160 पशु-बाड़ों को नुकसान पहुंचा है।
बहाली के काम में जुटी प्रशासनिक टीमें
प्रभावित इलाकों में बहाली का काम लगातार जारी है। स्थानीय प्रशासन की टीमें और आपातकालीन सेवाएं बंद सड़कों को खोलने, बिजली आपूर्ति बहाल करने और पेयजल infrastructure की मरम्मत में जुटी हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में मुख्य सड़कों और जरूरी जन-सुविधाओं की बहाली को प्राथमिकता दी जा रही है।



