रायपुर, 25 अक्टूबर 2026

बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में आगामी दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम की इस स्थिति को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है। किसानों को संभावित नुकसान से बचने के लिए फसलों की कटाई रोकने, कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने और खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।

वहीं, चक्रवाती तूफान के मद्देनजर किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने किसानों के हित में आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने के लिए विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और मैदानी अमले को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।

25 से 29 अक्टूबर तक बारिश की संभावना

भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना दबाव का क्षेत्र अगले कुछ घंटों में चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इस दौरान हवा की गति 115 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

चक्रवात के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में 25 अक्टूबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। विशेष रूप से 28 और 29 अक्टूबर को प्रदेश के कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने का पूर्वानुमान है।

इन जिलों में भारी बारिश की आशंका

मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 25 अक्टूबर को बस्तर संभाग के बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, दुर्ग और राजनांदगांव सहित कई जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है।

26 अक्टूबर को दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, कोंडागांव, कांकेर, नारायणपुर, बस्तर, बीजापुर और सुकमा सहित विभिन्न जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

27 अक्टूबर को भी प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। वहीं, 28 और 29 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में वर्षा होने का पूर्वानुमान है। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

किसानों को धान की कटाई रोकने की सलाह

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि जिन खेतों में धान, दलहन और तिलहन की फसलें पकने की अवस्था में हैं, वहां अगले दो से चार दिनों तक कटाई का काम स्थगित रखें।

जिन किसानों ने फसलों की कटाई शुरू कर दी है, वे कटी हुई फसलों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं। खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए उचित व्यवस्था करें, ताकि जलभराव के कारण फसलों को नुकसान न हो।

कृषि वैज्ञानिकों ने यह भी सलाह दी है कि फसलों में रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद ही आवश्यक कीटनाशकों और कवकनाशकों का छिड़काव करें। आगामी दिनों में रबी फसलों की बुवाई करने वाले किसानों को मौसम की स्थिति को देखते हुए नवंबर के प्रथम सप्ताह से बुवाई शुरू करने का सुझाव दिया गया है।

सब्जियों और फलदार पौधों को सुरक्षित रखने के निर्देश

तेज हवाओं और बारिश की आशंका को देखते हुए सब्जी एवं फल उत्पादक किसानों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, करेला और लौकी जैसी लता वाली सब्जियों को सहारा दें। केले के पौधों और फलदार वृक्षों को भी आवश्यकतानुसार सहारा देकर सुरक्षित रखें। सब्जियों के खेतों में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करें तथा बारिश के दौरान कीटनाशकों और कवकनाशकों का छिड़काव करने से बचें।

पशुपालक भी बरतें सावधानी

चक्रवाती तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए पशुपालकों को अपने पशुओं को सुरक्षित और सूखे स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है। तेज हवा और बारिश के दौरान पशुओं को पेड़ों के नीचे या खुले स्थानों पर बांधने से बचें। साथ ही उनके लिए सूखे चारे और स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करें।

मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखने की अपील

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम के पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखें और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जारी सलाह का पालन करें। समय रहते सावधानियां अपनाकर फसलों, उद्यानिकी उत्पादन और पशुधन को संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है।

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