रायपुर, 23 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ में यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने और परिवहन नियमों का पालन नहीं करने वाले बस संचालकों के खिलाफ परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने प्रदेश की 170 बसों के परमिट निरस्त कर उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इन बसों में अनिवार्य जीपीएस (GPS) और पैनिक बटन जैसी सुरक्षा सुविधाओं की कमी पाई गई थी। जुलाई से सितंबर 2026 तक चले विशेष जांच अभियान और नोटिस जारी करने के बाद यह कार्रवाई की गई। इसकी जानकारी अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने दी।
बिना वैध परमिट बस चलाने पर होगी जब्ती की कार्रवाई
परिवहन विभाग के अनुसार, परमिट निरस्त होने के बाद संबंधित बसों को उस परमिट के आधार पर संचालन की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई संचालक नियमों की अनदेखी कर इन बसों को सड़क पर चलाते हुए पाया जाता है, तो वाहन जब्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध परमिट बस चलाने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत सजा का प्रावधान है। बस संचालकों को यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
जुलाई से सितंबर तक चला विशेष जांच अभियान
राज्य शासन के निर्देश पर परिवहन विभाग ने जुलाई से सितंबर 2026 तक प्रदेशव्यापी विशेष जांच अभियान चलाया। इस दौरान रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर और अंबिकापुर सहित प्रमुख मार्गों तथा राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्री बसों की जांच की गई।
परिवहन विभाग की उड़नदस्ता टीमों और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों ने बसों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) और पैनिक बटन की उपलब्धता के साथ उनकी कार्यशीलता की भी जांच की। जांच में कई बसों में सुरक्षा उपकरण नहीं मिले, जबकि कुछ बसों में उपकरण लगे होने के बावजूद वे बंद पाए गए।
जांच में सामने आईं सुरक्षा संबंधी खामियां
परिवहन विभाग के अभियान में बसों के सुरक्षा उपकरणों से संबंधित कई अनियमितताएं सामने आईं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार:
- 412 बसों में जीपीएस नहीं मिला।
- 210 बसों में जीपीएस बंद पाया गया।
- 85 बसों में पैनिक बटन खराब मिले।
- 170 बसों के परमिट निरस्त किए गए।
जांच में सामने आया कि कई बस संचालक अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों से जुड़े नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। इससे यात्रियों की सुरक्षा और आपात स्थिति में सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
नोटिस के बाद भी नहीं सुधरे बस संचालक
परिवहन विभाग ने पहले चरण में 300 बस संचालकों को अंतिम नोटिस जारी कर सुरक्षा उपकरणों से संबंधित कमियां दूर करने के लिए 15 दिन का समय दिया था। विभागीय जानकारी के मुताबिक, इनमें से 140 बस संचालकों ने जीपीएस लगवाकर पोर्टल पर पंजीयन करा लिया, जबकि 170 बस संचालकों के खिलाफ परमिट निरस्त करने की कार्रवाई की गई।
हालांकि, जारी आंकड़ों में 300 नोटिस, 140 बसों में अनुपालन और 170 परमिट निरस्त होने का उल्लेख है। इन आंकड़ों का कुल योग 310 होता है। ऐसे में आंकड़ों के बीच अंतर को स्पष्ट करने के लिए विभागीय अभिलेखों से पुष्टि आवश्यक है।
महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन जरूरी
बसों में पैनिक बटन लगाने का उद्देश्य आपात स्थिति में यात्रियों को जल्द सहायता उपलब्ध कराना है। विशेष रूप से महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पैनिक बटन सक्रिय होने पर निर्धारित व्यवस्था के तहत कंट्रोल रूम तक आपात सूचना और वाहन की लोकेशन पहुंच सकती है। इससे संबंधित एजेंसियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
वहीं, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) के माध्यम से बस की लोकेशन पर नजर रखी जा सकती है। यह उपकरण वाहन के निर्धारित मार्ग और परमिट की शर्तों के अनुसार संचालन की निगरानी में भी सहायक होता है।
छत्तीसगढ़ में करीब 12 हजार बसें
परिवहन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में करीब 12 हजार बसें संचालित हैं। इनमें लगभग 4,500 यात्री बसें, 6,500 स्कूल बसें और करीब 1,000 ऑल इंडिया टूरिस्ट एवं निजी श्रेणी की बसें शामिल हैं।
अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े सभी वाहन मालिकों के लिए सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी करने वाले संचालकों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य बसों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, नियमों का पालन सुनिश्चित करना और यात्रियों को सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।



